मुनाफे से प्यार, जिंदगी से खिलवाड़

Ghaziabad Updated Sun, 17 Jun 2012 12:00 PM IST
शिप्रा में आग : विक्टोरिया पार्क मेरठ-उपहार सिनेमा दिल्ली में ऐसे ही उठी थी मौत की चिंगारी
गाजियाबाद/इंदिरापुरम। 1997 में दहकते जून की मनहूस 13 तारीख। दिल्ली का उपहार सिनेमा आग का गोला बन गया था और और देखते-देखते 59 लोग बेमौत मारे गए। आग और मौतों की वैसी ही खौफनाक कहानी 2006 में 10 अप्रैल को मेरठ के विक्टोरिया पार्क में दोहराई गई थी, जहां 50 लोगों की जिंदगी उस ज्वाला में होम हो गई थीं। शनि देव मेहरबान न होते, तो शनिवार को इंदिरापुरम के शिप्रा मॉल में भी कुछ वैसी ही अनहोनी होती। फर्र्ज कीजिए, सुबह की आग मॉल में वीकेंड की शाम को लगती तो लोगों की जान भी जाती।
मॉल का सेफ्टी सिस्टम कितना अच्छा काम कर रहा है, इसकी पोल शनिवार को बेसमेंट में लगी आग ने खोल दी है। इंतजाम अपडेट होते तो एक चिंगारी उठते ही इमरजेंसी सायरन बजता और झटपट आग बुझा ली जाती। मुनाफे के फेर में उलझे मॉल के सिक्योरिटी स्टाफ को पता तब लगा, जब पूरा मॉल धुएं से भर गया। कहा तो ये भी जा रहा है कि किसी राहगीर ने बाहर से मॉल में धुआं उठता देख शोर मचाया, तब सिक्योरिटी वालों की नींद टूटी। बाकी की कसर वेंटीलेशन की खराब व्यवस्था ने कर दी, इससे दमकलकर्मियों को अंदर घुसने में दिक्कत आई। चीफ फायर अफसर विजय कुमार ने बताया कि मॉल में फायर फाइटिंग के आधे-अधूरे इंतजाम नजर आए हैं।

कब-कब हुए हादसे
ईडीएम मॉल के बिग बाजार में छूट के दिन 70 हजार लोग पहुंच गए थे और भगदड़ मच गई थी। इसमें कई घायल हुए।
शॉप्रिक्स मॉल वैशाली में फिल्म स्टार को देखने के लिए इतनी ज्यादा भीड़ हो गई थी लोग एक के ऊपर एक गिर गए। महिलाओं और बच्चों के ऊपर से लोग गुजर गए।
ऑप्युलेंट मॉल में आग लगने पर भगदड़ की स्थिति बन गई थी और कई लोग घायल हो गए थे।
एमएमएक्स मॉल में कांवड़ियों ने हंगामा कर दिया था, इसके बाद लोगों के बाहर निकलने के दौरान भगदड़ की स्थिति बनी।

‘ब्रीथिंग ऑपरेटर सेट’ की ली गई मदद
शीशे टूटने के बाद भी धुआं इतना अधिक था कि दमकल कर्मियों को ब्रीथिंग ऑपरेटर सेट पहनकर स्टोर में एंट्री करनी पड़ी। धुएं के कारण दमकलकर्मियों को आग बुझाते समय सांस लेने में भी परेशानी हो रही थी। उधर, मॉल के बेसमेंट से पीएनजी पाइप लाइन गुजर रही है, इससे ऊपर की फ्लोर पर बने रेस्टोरेंट को गैस मुहैया कराई जाती है। बढ़ते दबाव में पाइप लाइन फट सकती थी। देखते ही देखते ज्वलनशील गैस से पूरा शिप्रा मॉल राख हो जाता।

फूड बाजार में आग शार्ट सर्किट की वजह से लगी। धुएं से आग बुझाने में दिक्कत हुई। दीवार और शीशे तोड़कर धुआं निकाला गया। बचाव कार्य में हमारी 20 टीमें लगी थी। अब स्थिति सामान्य है। नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है।
- युद्धवीर सिंह, सिक्योरिटी इंचार्ज, शिप्रा मॉल
2006 में शिप्रा मॉल में कं पाउंडिंग कराकर बेसमेंट में फूड बाजार को स्वीकृति दी गई थी। शनिवार को मॉल कंपाउंडिंग नक्शे की फाइल नहीं मिल सकी है। सोमवार को फूड बाजार का नक्शे से मिलान किया जाएगा। अगर खामियां मिली तो दोषी कार्रवाई से बचेंगे नहीं। - डीपी सिंह, ओएसडी जीडीए

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