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बेआवाज, अब नहीं होंगे महंगे इलाज के मोहताज

Ghaziabad Updated Fri, 01 Jun 2012 12:00 PM IST
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मूक बधिरों के लिए रामबाण साबित होगा कॉक्लियर इम्प्लांट
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गाजियाबाद। बेआवाज अब महंगे इलाज के मोहताज नहीं होंगे। महज 80 हजार रुपये का भारतीय कॉक्लियर इम्प्लांट मूक-बधिरों की आवाज बनेगा। आने वाले दो महीने में बेहतर और सस्ता कॉक्लियर इम्प्लांट गाजियाबाद में मौजूद होगा। अभी तक आठ लाख रुपये कीमत के विदेशी कॉक्लियर इम्प्लांट को लगवाना सबके बस की बात नहीं थी।
भारतीय कॉक्लियर इम्लांट की तकनीक और विशेषताओं को लेकर मई के दूसरे हफ्ते में ईएनटी विशेषज्ञों की गोवा में एक वर्कशॉप हुई। गाजियाबाद से ईएनटी और नेक एंड हेड सर्जन डा. बीपी त्यागी ने गाजियाबाद का प्रतिनिधित्व किया। भारतीय कॉक्लियर इम्प्लांट तकनीकी लिहाज से बेहतर है और इसकी कीमत कम होने से ज्यादा मरीजों को फायदा मिलेगा।


क्या करता है कॉक्लियर इम्प्लांट
कान में वेस्टिबुलर और कॉक्लियर दो नसें होती हैं। इन नसों में खराबी से इंसान मूक-बधिर होता है। इनकी जगह कॉक्लियर इम्प्लांट लगने से कानों तक आवाज आने लगती है। इसके बाद स्पीच थेरेपी के जरिए महीने भर में मरीज बोलने भी लगता है।

डीआरडीओ के अंतर्गत एनएसटीएल ने बनाया है इम्प्लांट
डिफेंस रिचर्स डेवलपमेंट आर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ) के अंतर्गत काम करने वाली संस्था नेवल साइंस एंड टेक्नोलॉजिकल लैबोरेटरी (एनएसटीएल) ने भारतीय कॉक्लियर इम्प्लांट बनाया है। फरवरी में इसके क्लीनिकल ट्रायल शुरू हो चुके हैं और अगले दो महीनों में ये बाजार में उपलब्ध होगा।


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