भोजपुरी कविताओं से सजी एक श्‍ााम

Ghaziabad Updated Mon, 28 May 2012 12:00 PM IST
गाजियाबाद। जग में माई बिना केहुए सहाई न होई, केहू कितनो दुलारी बाकी माई न होई। बिहार के सिवान से आए भोजपुरी कवि सुभाष चंद्र की इस कविता को सुनकर श्रोता मां के स्नेह और प्रेम में गोते खाने लगे। मौका था पूर्वांचल भोजपुरी महासभा की ओर से आयोजित पहले भोजपुरी कवि सम्मेलन का। जीटी रोड स्थित एक होटल में हुए कवि सम्मेलन में विशेष मेहमान के रूप में हिन्दी और भोजपुरी अभिनेता सुरेंद्र पाल सिंह मौजूद थे। इसमें पूर्वी उप्र, बिहार, झारखंड के राष्ट्रीय स्तर के कवियों ने भाग लिया। कवि गिरधारी, कुबेर नाथ सिंह, बादशाह तिवारी, मनोज भावुक, मुकेश श्रीवास्तव, कु. शैलजा सिंह, अनूप पांडेय, सुनील श्रीवास्तव, श्रीप्रकाश आदि ने कविताएं सुनाईं।

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