खरीददारों का क्या कसूर

Ghaziabad Updated Sun, 20 May 2012 12:00 PM IST

टावर सील होने से मुश्किल में पड़े तमाम ग्राहक
आगे की सोचकर और दहशत में आ गए हैं खरीददार


गाजियाबाद। दिल्ली-एनसीआर में आशियाना बनाने को लोग क्या-क्या नहीं करते? तिनका-तिनका जोड़ते हैं, तब कहीं फ्लैट खरीदते हैं। जमीन और अपार्टमेंटों के पीछे का खेल बिल्डर ग्राहकों के सामने ही नहीं आने देते।
न्यायखंड-2 में जीडीए के निशाने पर आए इन दो टावरों की कहानी भी कुछ ऐसी है। लोग न जाने कब की बुकिंग करा चुके थे। अब फ्लैट मिलने का समय करीब आ रहा था तो जीडीए ने अवैध निर्माण का ठप्पा लगाकर यह दो टावर सील कर दिए हैं। इससे वे सभी खरीददार संकट में आ गए हैं, जिन्होंने यहां बुकिंग करा रखी थी। अनुमान लगाया जा रहा है इस प्रोजेक्ट में ग्राहकों के डेढ़ सौ
से दो सौ करोड़् तक पैसा फंस गया है।

ग्राहकों की मुश्किल
फ्लैट लेने के लिए लोग बैंकों से लोन लेते हैं। लोन मंजूर होते ही बैंक की ईएमआई शुरू हो जाती है। आमदनी में कटौती शुरू हो जाती है। एक एक दिन करके लोग अपने घर में पहुंचने का इंतजार करता है। नौकरपेशा लोग छुट्टियां ले लेकर साइट विजिट भी करते हैं। बिल्डर फिर भी खेल कर ही देते हैं। जैसा कि इस प्रोजेक्ट में नजर आ रहा है।

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