बिजली न पानी कैसे कटे जिंदगानी

Ghaziabad Updated Sat, 12 May 2012 12:00 PM IST
गाजियाबाद। गर्मियों में लोगों को 24 घंटे बिजली देने का दावा पावर कारपोरेशन ने बड़े ठाट से किया था। हाल ये है कि जितनी मांग है उससे आधी बिजली भी निगम के पास नहीं है। पिछले दो दिन में बिजली की मांग 40 फीसदी बढ़ गई है। कम से कम 10 घंटे की विद्युत कटौती विभाग की मजबूरी बन गई। इसके पीछे बड़ा कारण इंफ्रास्ट्रक्चर में प्लानिंग की कमी है। ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन के बीच का फर्क प्लानिंग नहीं होने के चलते पाटना संभव नहीं हो रहा।
11 सौ मेगावाट के पार पहुंचा लोड ः शहर में 800 मेगावॉट की मांग का लोड था। पिछले दो दिनों में लोड 1100 मेगावाट के पार हो चुका है। इस वक्त शहर में 1120 मेगावाट की मांग चल रही थी। यानी 800 मेगावाट पर 40 फीसदी की बढ़ोतरी हो गई है। जबकि शहर को आपूर्ति के लिए महज 400 मेगावाट ही बिजली मिल रही है, जिसमें 18 घंटे की बिजली देना भी मुमकिन नहीं है। अब आप खुद ही अंदाजा लगा सकते हैं कि छह घंटे की लोकल, चार घंटे की लखनऊ से इमरजेंसी रोस्टिंग मिलाकर 10 घंटे की कटौती से ज्यादा की कटौती हो रही थी। अब शहर में 12 घंटे तक बिजली दी जा रही है। बिजली कट से परेशान लोगों की दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हो रही है। दिन भर पानी के लिए मारामारी रहती है।

अब तो मौला मेघा बरसा...
पावर कारपोरेशन को बारिश के बाद हालात सुधरने की उम्मीद है। असल में ट्रांसमिशन महज 300 एमवीए की क्षमता रखता है, जिससे सिर्फ 18 घंटे की आपूर्ति ही संभव है। इससे ज्यादा की आपूर्ति केलिए 300 एमवीए की क्षमता से कम बिजली की मांग लानी होगी। जो बिना बारिश के नहीं आ सकती।

24 घंटे बिजली अभी नहीं
अभी शहरवासियों को 24 घंटे निर्बाध विद्युत आपूर्ति के लिए कुछ दिन और इंतजार करना होगा। इसका कारण है डीजल पावर हाउस (डीपीएच) ट्रांसमिशन का 132 केवीए सब स्टेशन का बनकर तैयार न होना। अप्रैल में काम पूरा न होने के चलते कारपोरेशन ने इसे मई के अंत तक शुरू करने का दावा किया है। मालीवाड़ा स्थित डीपीएच ट्रांसमिशन सब स्टेशन के लिए मुरादनगर से लाइन को शहर के बीचों बीच गुजारा जाना है। दिक्कत यह है कि मुरादनगर ट्रांसमिशन सब स्टेशन से डीपीएच सब स्टेशन तक 67 मोनोपोल के जरिए हाईटेंशन लाइन को लाया जाना है। मगर, लाइन का रूट विवादों में रहने से तीन मोनोपोल नहीं लग पा रहे हैं। सब स्टेशन का निर्माण अगस्त 2011 में पूरा होना था जो कि अक्तूबर 2011 किया गया और अब फिर इसे अप्रैल 2012 तक बढ़ा दिया गया था।
बिल्डर की दबंगई में 80 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट अटका पड़ा है। असल में, राजनगर एक्सटेंशन स्थित डीपीएसजी स्कूल के सामने एक स्थानीय बिल्डर भूमि पर कब्जे के चलते पोल नहीं लगने दे रहा है।


ट्रांसमिशन के ये सब स्टेशन बनते तो न होती दिक्कत
सब स्टेशन स्थिति
कान्हा उपवन 132 केवीए काम चल रहा है
टीला मोड़ 132 केवीए काम चल रहा है
डीपीएच 132 केवीए विवाद सेे अटका
यूपीएसआईडीसी 132 केवीए जमीन नहीं मिली


इनकी सुनिये
मसले का हल अभी तक नहीं निकल पाया है। मंगलवार को प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बिल्डर से मुलाकात की गई। कोशिश है कि मई के अंत तक सब स्टेशन शुरू किया जा सके। - वीके जैन, अधीक्षण अभियंता (ट्रांसमिशन)


शहर में 24 घंटे की आपूर्ति करना तब तक संभव नहीं है, जब तक कि डीपीएच का ट्रांसमिशन सब स्टेशन बनकर तैयार नहीं हो जाता है। ट्रांसमिशन के सब स्टेशन ओवर लोड होने के चलते ही छह घंटे की कटौती करना मजबूरी है। - अरुण कुमार, अधीक्षण अभियंता (डिस्ट्रीब्यूशन)

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