आसमान निगल गया या जमीन

Ghaziabad Updated Fri, 04 May 2012 12:00 PM IST

एफआईआर हुई, बार-बार जांच बैठी मगर नहीं लगा कोई सुराग

छह लडकियां हुईं गायब

गाजियाबाद। देश में अनाथ और लावारिस बच्चों से दरिंदगी की घटनाओं के बीच यह खबर गाजियाबाद से आई है। यहां यूपी सरकार के केयर होम से छह लड़कियां रहस्यमय हालात में लापता हो गई हैं। इनमें पांच तो छह महीने के अंदर ही गायब हुई हैं। 12 से 18 वर्ष उम्र की ये वो लड़कियां हैं, जो मेरठ, अलीगढ़ और सहारनपुर मंडल में अलग-अलग जगहों से लाकर यहां रखी गई थीं। चुपके-चुपके एफआईआर और मजिस्ट्रेटी जांचें बिठाने के बाद प्रशासन लापता लड़कियों को भूल गया। पुलिस के पास उनके बारे में बताने को कुछ है नहीं और संप्रेक्षणगृह वाले सबकी फरारी के किस्से सुनाकर मामले से पल्ला झाड़ रहे हैं। लड़कियां कहां गईं, उनके साथ क्या हुआ, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
राजनगर स्थित राजकीय संप्रेक्षण गृह से गायब हुई लड़कियों के नाम शिवानी, कल्पना,अंजलि, वर्षा, रंजीता और पोछो हैं। इन्हें मेरठ, सहारनपुर और अलीगढ़ मंडल के अंदर छोटे-मोटे अपराधों में पकड़ा गया था। ऐसी लड़कियों को गाजियाबाद के राजकीय संप्रेक्षण गृह में रखा जाता है। इस संप्रेक्षण गृह की शुरुआत अप्रैल 2009 में हुई थीं। लड़कियों की देखरेख को यहां अधीक्षिका के साथ दो होमगार्ड और तीन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तैनात चल रहे हैं। फिर भी ऑब्जर्वेशन होम से लड़कियों के गायब होने का सिलसिला सा चल रहा है।
लड़कियों के गायब होने के पीछे संप्रेक्षणगृह वाले कुछ ऐसी कहानी सुनाते हैं। पहले जब संप्रेक्षण गृह राजनगर के मकान नंबर 3/7 मेें था तो यहां से मार्च 2010 मेें शिवानी शर्मा फरार हो गई। वह गाजियाबाद के तुराबनगर मार्के ट में लावारिस घूमती मिली थी, जिसके बाद प्रशासन ने उसे केयर होम में रखा था। शिवानी का अब तक पता नहीं लगा है। इसके बाद संप्रेक्षण गृह को राजनगर के ही मकान नंबर 3/62 में शिफ्ट कर दिया गया। यहां से सितंबर 2011 से फरवरी 2012 के बीच 5 लड़कियां गायब हो गई। पिछले साल जुलाई में पुराने बस अड्डे से पुलिस को नेपाल की रहने वाली कल्पना लावारिस हाल में मिली थी। उसे संप्रेक्षण गृह भेज दिया गया था। 5 सितंबर को सुबह 5.30 बजे कल्पना भी गायब हो गई। बुलंदशहर में ट्रेन में चोरी के मामले में पकड़ी गईं अंजलि और वर्षा के अलावा इंदिरापुरम के मैरिज होम से चोरी के मामले में पकड़ी गई रंजीता के साथ भी ऐसा ही हुआ। 31 दिसंबर 2011 को यह तीनों भी संप्रेक्षण गृह से गायब हो गईं।
संप्रेक्षणगृह स्टाफ का दावा है कि अंजलि, वर्षा और रंजीता कमरे में एसी लगाने वाली जगह से निकल गईं। लड़कियों के गायब होने का सिलसिला इतने पर भी नहीं रुका। इसी साल फरवरी में मध्य प्रदेश की रहने वाली आदिवासी लड़की पोछो (12) भी ऑब्जर्वेशन होम से रहस्यमय हालात में गुम हो गई। अफसर सफाई देते हैं कि पोछो को टीचर पढ़ा रही थी तो वह मौका पाकर गेट से बाहर कूद गई। सभी मामलों की प्रोबेशन विभाग की ओर से कविनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी मगर पुलिस किसी एक लड़की को भी बरामद नहीं कर सकी है। लापता लड़कियां कहां हैं, उनकी बरामदगी के लिए प्रशासन और पुलिस के स्तर से क्या कोशिश हो रही है, इनमें से किसी एक सवाल का जवाब अफसरों के पास नहीं है।


केयर होम ने पल्ला झाड़ा
नाम उम्र गायब होने की तारीख
शिवानी 16 मार्च माह 2010
कल्पना 16 5 सितंबर 2011
अंजलि 18 31 दिसंबर 2011
वर्षा 16 31 दिसंबर 2011
रंजीता 11 31 दिसंबर 2011
पोछो 12 2 फरवरी 2012



मैं 24 से 31 दिसंबर 2011 तक अवकाश पर थी। 31 दिसंबर को अंजलि, वर्षा और रंजिता फरार हो गईं। मकान मालिक ने लड़कियों के कमरे से एसी निकाल लिया था। जिसकी वजह से वह दीवार में भागने की जगह बनाने में सफल रहीं।
-जुवैदा खान, अधीक्षिका संप्रेक्षण गृह



गायब लड़कियों के बारे में गाजियाबाद के डीएम और एसएसपी के अलावा उनके गृह जनपद के पुलिस अधीक्षकों जानकारी दे दी गई है। सभी मामलों की पुलिस में रिपोर्ट दर्ज है। अभी तक किसी लड़की के बरामद होने की सूचना नहीं है।
राजीव शर्मा , जिला प्रोबेशन अधिकारी


संप्रेक्षण गृह से लड़कियों के गायब होने का मामला गंभीर है। सभी घटनाओं की नए सिरे से समीक्षा कराई जाएगी। लड़कियां कैसे भाग गईं, इसकी गहराई से छानबीन कराई जाएगी।
जीराम, प्रभारी जिलाधिकारी गाजियाबाद

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