जनशताब्दी एक्सप्रेस का इंजन हिंडन बैराज पर कोच छोड़कर स्टेशन पहुंचा

Ghaziabad Updated Thu, 03 May 2012 12:00 PM IST
अधिकारियों में मचा हड़कंप
गाजियाबाद। नई दिल्ली से देहरादून जा रही जनशताब्दी एक्सप्रेस का इंजन मंगलवार को हिंडन बैराज पर 13 कोच छोड़कर अकेले स्टेशन पहुंच गया। अधिकारियों को जब इसका पता चला कि तो उनके होश उड़ गए।
जनशताब्दी एक्सप्रेस नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से देहरादून के लिए सवा तीन बजे रवाना हुई। लेकिन तिलक ब्रिज स्टेशन के पास इंजन के पहिए से धुआं निकलने लगा। चालक ने ट्रेन को तत्काल रोका और चेक करने के बाद फिर आगे बढ़ा। दोपहर बाद 3:50 बजे ट्रेन ने साहिबाबाद रेलवे स्टेशन को क्रास किया। लेकिन जैसे ही हिंडन बैराज पर पहुंची, इंजन ने लोड लेना बंद कर दिया। इसकी सूचना चालक राम केवल यादव ने दिल्ली मंडल के सीनियर डिवीजनल मैकेनिकल इंजीनियर को दी। इसके बाद वह केवल इंजन को लेकर गाजियाबाद होम सिग्नल पर पहुंच गया। चालक स्टेशन मास्टर से सिग्नल डाउन लेकर स्टेशन पर पहुंच गया।

ट्रेन आने की हुई घोषणा
जनशताब्दी एक्सप्रेस ने जैसे ही गाजियाबाद होम सिग्नल को पार किया टीडी केबिन से घोषणा होने लगी कि देहरादून जनशताब्दी एक्सप्रेस प्लेटफार्म नंबर दो पर आ रही है। ट्रेन में सवार होने के लिए यात्रियों ने कमर कस ली। लेकिन जब उन्होंने केवल इंजन देखा तो उनके होश उड़ गए। इस तरह का अजब-गजब किस्सा रेलवे के इतिहास में पहली बार हुआ जब केवल इंजन ही प्लेटफार्म पर पहुंचा और डिब्बे पीछे ही रह गए।

आटोमेटिक सिग्नल से टला हादसा
नई दिल्ली-देहरादून जनशताब्दी एक्सप्रेस में सवार एक हजार से ज्यादा मुसाफिरों की जान बुधवार को आटोमेटिक सिग्नल के चलते बच गई। वरना पीछे से आने वाली ट्रेन की चपेट में शताब्दी के कई कोच आ जाते। रेल अधिकारियों ने बताया कि साढ़े तीन बजे से लेकर साढ़े पांच बजे के बीच कोलकाता राजधानी, भुवनेश्वर राजधानी, कानपुर शताब्दी, लखनऊ शताब्दी, सियालदाह राजधानी, पूर्वा एक्सप्रेस सहित करीब एक दर्जन ट्रेनों का समय गाजियाबाद स्टेशन पर पहुंचने का हो चुका था।

दो घंटे अटकी रही सांस
जनशताब्दी एक्सप्रेस के 13 कोच जब तक स्टेशन पर नहीं पहुंच गए तब तक रेल अधिकारियों की सांसें अटकी रहीं। स्थानीय रेल अधिकारियों ने स्टेशन पर अकेले पहुंचे इंजन को देख तत्काल 23950 नंबर इंजन को हिंडन बैराज पर भेजा और वहां खड़े 13 कोच को स्टेशन पर मंगवाया। इसके बाद अधिकारियों और मुसाफिरों ने रात की सांस ली। क्षेत्रीय प्रबंधक डीके चोपड़ा ने बताया कि डिब्बों को स्टेशन पर लाने के लिए साहिबाबाद से स्पेशल इंजन भेजा गया था।

तीन सेक्शन आॅटोमेटिक सिग्नल से लैस
नार्दर्न रेलवे के महज तीन सेक्शन ही आॅटोमेटिक सिग्नल से लैस हैं। रेल अधिकारियों ने बताया कि नैनी-इलाहाबाद, राजपुरा-अंबाला और नई दिल्ली गाजियाबाद सेक्शन हैं, जो सिस्टम से लैस हैं। सिस्टम का फायदा यह है कि जब तक ट्रैक खाली नहीं होगा उस पर दूसरी ट्रेन नहीं आ सकती है। स्थानीय रेल अधिकारियों ने बताया कि यदि यह घटना गुलधर सेक्शन के बीच होती तो हादसा हर हाल में होता।

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