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90 मिनट जिरह ः भागेंगे आैर न सुबूत मिटाएंगे

Ghaziabad Updated Wed, 02 May 2012 12:00 PM IST
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गाजियाबाद। आरुषि-हेमराज मर्डर केस में जेल गईं डॉ. नूपुर तलवार की जमानत अर्जी पर मंगलवार को सीबीआई और बचाव पक्ष के वकीलों की बहस हुई। सीबीआई विशेष न्यायाधीश एस. लाल की कोर्ट में चली डेढ़ घंटे की जिरह सुनने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। डेढ़ घंटे की इस जिरह में बचाव पक्ष ने करीब 55 मिनट तक अपनी दलील पेश की। जबकि सीबीआई की ओर से 35 मिनट जिरह की गई। दोनों ओर की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने फिलहाल फैसला बुधवार तक सुरक्षित रख लिया।
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10.30 से जिरह शुरू
मंगलवार सुबह साढे़ दस बजे सीबीआई और बचाव पक्ष के वकीलों में जिरह शुरू हुई। बचाव पक्ष की ओर से एडवोकेट विजयपाल सिंह राठी, प्रवीण राय और आरके थरेजा ने दलील पेश की। वह सभी तथ्य दिए गए, जोकि उन्होंने सोमवार को अंतरिम जमानत के लिए कोर्ट के समक्ष दिए थे। मंगलवार को अपनी जिरह में बचाव पक्ष ने एक नई बात का हवाला भी दिया। एडवोकेट विजयपाल राठी ने कहा कि तलवार दंपति के घर का पोली लाइट टेस्ट भी कराया गया था। मकान की किसी दीवार पर खून के निशान नहीं पाए गए। शोहरत नामक पेंटर के बयान का हवाला भी कोर्ट को दिया।



अपने-अपने तर्क
19 अप्रैल 2010 को पेंटर शोहरत ने बयान दिया था कि दस साल पहले डाक्टर तलवार का मकान पहली बार उसी ने पेंट किया था। दूसरी बार उसने इसी मकान को जुलाई 2009 में पेंट किया। यानी आरुषि-हेमराज मर्डर केस से ठीक 15 माह बाद। ऐसे में भला 15 माह बाद कोई सबूत क्यों मिटाएगा, और यदि मिटाएगा तो 15 माह तक पुलिस और सीबीआई ने आखिर जांच क्या की। उनके मुवक्किल प्रतिष्ठित डेंटिस्ट हैं। राजेश तलवार के पिता व भाई भी डॉक्टर हैं। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि वह भरोसा दिलाते हैं कि अगर उनक े मुवक्किल को जमानत दी जाती है तो वह न तो सबूतों से छेड़छाड़ करेंगे, न कानून से भागेंगे और जब भी कोर्ट आदेश करेगा, पेश होंगे।



फैसला बुधवार के लिए सुरक्षित
सीबीआई केवरिष्ठ लोक अभियोजक आरके सैनी, एस. इस्लाम और बीके सिंह ने इस दलील के विरोध में कहा कि आरोपियों ने योजनाबद्ध तरीके से सबूत मिटाए हैं। आपराधिक वारदात में फंसे व्यक्ति की सामाजिक प्रतिष्ठा से कोई मतलब नहीं है। नूपुर पहले भी कोर्ट में पेश नहीं हो रही थीं। स्पेशल रिव्यू की सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट से आदेश के बाद ही उसने जेएम कोर्ट में सरेंडर किया। ऐसे में उसे जमानत नहीं दी जानी चाहिए। सीबीआई की 35 मिनट की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने जमानत अर्जी पर फैसला बुधवार तक के लिए सुरक्षित रख लिया।




प्लीज! हमें जेल से जाने दीजिये
d अमर उजाला ब्यूरो
गाजियाबाद। डॉ. राजेश तलवार और नूपुर की माता लता चिट सिंह मंगलवार को नूपुर से जेल में मिलाई करने पहुंचे। दोनों अलग-अलग आए, मगर गए साथ-साथ। तकरीबन 24 मिनट तक इनकी मुलाकात हुई। इन्होंने आपस में क्या कहा और क्या सुना। ये तो वे ही जानते हैं, क्योंकि उन्होंने जुबान पर खामोशी का लबादा औढ़ा हुआ था। मिलाई के लिए आने-जाने के दौरान उनसे बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया। इस दौरान मिलाई के लिए गए अन्य लोगों से बात हुई तो उनका कहना था कि इनकी आंखें नम थी। बातें भी बहुत धीरे-धीरे और कम कर रहे थे। वे पॉलिथिन में कुछ सामान लेकर आए थे।
लता चिट सिंह एक रिश्तेदार महिला के साथ दोपहर 12:15 बजे मिलाई के लिए जेल के मिलाई कक्ष में पहुंची। वह हाथ में एक प्लास्टिक का पॉलीथिन लिए हुई थी, जिसमें फल होना बताया गया। वे 12 बजे से पहले यहां आ गई थी। 12:20 बजे डॉ. राजेश तलवार अपने कजन केसाथ तेज कदमों से मिलाई कक्ष में पहुंचे। 12:40 बजे राजेश तलवार का कजन मिलाई कक्ष से निकला और लंबे-लंबे डग भरता हुआ जेल से करीब 100 मीटर दूर खड़ी सेंट्रो कार स्टार्ट कर उसे जाने वाले रास्ते की तरफ मोड़ ली। 12:44 बजे राजेश तलवार, लता चिट सिंह और इनके साथ आई महिला मिलाई कक्ष से निकले। तीनों साथ थे। इस दौरान मीडिया ने उनसे बात करने की कोशिश की। लेकिन तीनों खामोश ही रहे। कोई जवाब नहीं दिया। तेज-तेज कदमों से चलने लगे। राजेश तलवार ने जेल से लौटते वक्त सिर्फ इतना कहा कि ‘हमें जाने केलिए रास्ता दे दीजिए।’ फिर चारों लोग कार से रवाना हो गए।

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