हड़ताल खत्म होते ही लगी फरियादियों की भीड़

Firozabad Updated Sun, 24 Nov 2013 05:39 AM IST
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फीरोजाबाद। ग्यारह दिन की हड़ताल समाप्त होने के बाद शनिवार को कार्यालय खुले तो फरियादियों की भीड़ लग गई। कोई पेंशन नहीं पहुंचने की फरियाद लेकर आया था तो एआरटीओ कार्यालय में अस्थाई लाइसेंस को बनवाने वालों की भीड़ दिखाई दी। वाणिज्यकर, कोषागार में भी कामकाज होता दिखाई दिया। कर्मचारी पुरानी फाइलों को खंगाल रहे थे।
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राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रांतीय आह्वान पर जिले के कर्मचारी पिछले ग्यारह दिन से हड़ताल पर थे। इसके कारण विकास भवन सहित कई विभागों में कामकाज बंद था। शुक्रवार की शाम को प्रांतीय नेतृत्व की ओर से हड़ताल के स्थगन की खबर मिली तो कर्मचारी सुबह दफ्तरों में पहुंच गए। विकलांग कल्याण कक्ष के बाहर आधा दर्जन से अधिक बुजुर्ग एवं विकलांग पेंशन नहीं पहुंचने की फरियाद लेकर पहुंचे। समाज कल्याण कक्ष के बाहर तीन महिलाएं बैठी थीं। ठीक सामने मेज खाली थी। कंप्यूटर कक्ष में प्रदीप पांडे, मुसद्दक हुसैन व्यस्त थे। डीडीओ कार्यालय के सभी कक्षों में काम हो रहा था। डीपीआरओ के साथ ही अल्पसंख्यक विभाग, मत्स्य, कृषि विभाग के कर्मचारी भी गोष्ठी की तैयारी करते दिखे। सीडीओ हीरालाल की घंटी पर तुरंत ही विभागीय अधिकारी व कर्मचारी दस्तक दे रहे थे। दोपहर 12 बजे करीब एआरटीओ भवानीदीन के कक्ष में लाइसेंस पर हस्ताक्षर कराने को भीड़ जमा थी। बायोमैट्रिक मशीन पर एक युवती लर्निंग लाइसेंस बनवाने को सीट पर बैठी हुई थी। अस्थाई लाइसेंस काउंटर पर भीड़ रही। वाणिज्यकर विभाग का स्टाफ फाइलों को खंगाल रहा था। बीएसए के साथ ही सीएमओ कार्यालय में काम होता दिखाई दिया।
बोले नहीं माने तो फिर आंदोलन
सफाई कर्मचारियों को प्रधानों से मुक्ति मिलने की मांग को स्वीकार करने के फैसले की जानकारी होते ही सफाई कर्मचारी काफी खुश थे। जिलाध्यक्ष मुलायम सिंह के पास बधाइयां आ रही थीं। इसके साथ संयुक्त परिषद के जिलाध्यक्ष लटूरी सिंह, महामंत्री दयाशंकर शर्मा के साथ प्रेमप्रकाश कुशवाह का कहना था कि सरकार को हमारी मांगों को मानना ही पड़ेगा।

फरियादी बोल अब होगा काम

शिकोहाबाद के अंगदपुर निवासी बुजुर्ग उल्फत सिंह बैंक की किताब थामे सुबह दस बजे विकास भवन पहुंच गए। उनकी पेंशन धनराशि ही नहीं पहुंची। कई दिनों से विभाग के चक्कर लगाने को मजबूर थे।

बुजुर्ग मिंतराज का कहना था कई बार चक्कर लगा चुके लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती। हले 3600 रुपये आए थे। इस बार 1800 क्यों भेजे। हड़ताल के कारण आए नहीं। कार्यालय खुलने की सूचना मिली तो सुबह ही दौड़ लिए।

सरजीवन नगर निवासी विकलांग नीरज की पेंशन भी खाते में नहीं पहुंची। ऑटो से चौराहे से उतरने के बाद पैदल ही वह विकलांग कल्याण विभाग में पहुंचा। बोला कि हड़ताल खुल गई अब तो सुनवाई हो।

फौरन सिंह पेंशन खाते में नहीं आने के कारण शनिवार को पहुंचे। उन्होंने कहा कि गांव के लड़के ने बताया कि आज हड़ताल नहीं है इसलिए सुबह ही चल दिया। अब बाबू सुन लें तबही तो काम होगो।

श्यामादेवी बेटी की शादी अनुदान योजना का फार्म भरने के लिए हड़ताल के दौरान भी तीन बार विकास भवन तक आईं। शनिवार को हड़ताल खत्म की जानकारी मिली तो वह सुबह ही पहुंच गई।

मूर्ति देवी पत्नी कुशलपाल विधवा पेंशन के लिए आवेदन फार्म भरने की जानकारी करने के लिए पहुंची थी। मूर्ति का कहना है कि उसे जानकारी नहीं है। हड़ताल के कारण नहीं आए।
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