कैसे हो सुरक्षा: दर्जा कोतवाली का, मानक चौकी के

Firozabad Updated Sun, 24 Nov 2013 05:39 AM IST
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फीरोजाबाद। ट्रेन यात्रियों को सुरक्षा देने के लिए रेलवे विभाग कतई गंभीर नजर नहीं आता। बेखौफ बदमाश ट्रेनों में एक के बाद एक घटना को अंजाम देकर फरार हो जाते हैं। फीरोजाबाद रेलवे स्टेशन पर बने जीआरपी थाने पर कोतवाल की तैनाती के साथ ही शासन ने थाने से कोतवाली का दर्जा दे दिया लेकिन फोर्स की तैनाती आज भी फीरोजाबाद चौकी के हिसाब से ही है।
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जोधपुर हावड़ा में पड़ी डकैती के बाद आरपीएफ, जीआरपी के साथ रेलवे विभाग के अधिकारी यात्रियों की सुरक्षा के लिए कतई गंभीर नजर नहीं आए। यात्री भी ट्रेन में डकैती की घटनाओं से दहशत में नजर आए। जिन के कंधों पर सुरक्षा का जिम्मा है, वह भी फोर्स के अभाव में हाथ खड़े करते नजर आते हैं। जीआरपी थाने में तैनात फोर्स पर गौर किया जाए तो सभी ड्यूटियां निकालने के बाद मात्र पांच जवान ऐसे बचते हैं जिन को चार प्लेटफार्म के साथ प्रतिक्षालय, मालगोदाम के साथ अन्य स्थानों पर सुरक्षा के लिए लगाया जाता है। फीरोजाबाद रेलवे स्टेशन पर बने जीआरपी थाने पर कोतवाल की तैनाती के साथ ही शासन ने थाने से कोतवाली का दर्जा दे दिया लेकिन फोर्स की तैनाती आज भी फीरोजाबाद चौकी के हिसाब से ही है।
इन मानक के अनुसार तैनात होना चाहिए फोर्स
वर्तमान फोर्स होना चाहिए
कोतवाली 01 01
उपनिरीक्षक 01 05
हैंड कांस्टेबिल 01 05
सिपाही 30 50

इन स्थानों पर जाती है जीआरपी की ड्यूटियां
महानंदा एक्सप्रेस में चार सिपाही, पारसनाथ एक्सप्रेस में दो, तूफान में दो, अनन्या में दो, गोमती मेें दो, कार्यालय ड्यूटी में चार, एक पैरवी, एक डाक, तीन पेहरा, दो वीआईपी में चले जाते हैं सिपाही।

(नोट यात्रियों के फोटो हैं)
सुरक्षा के नाम पर पहल नहीं करती सरकार
जोधपुर हावड़ा में डकैती की जानकारी होने पर ललित यादव बोले यात्री कहीं पर भी सुरक्षित नहीं है। सरकारें अपना पेट भरने में लगी हैं। जनता के साथ लूटपाट आम बात हो गई है। यात्री सुरक्षित नहीं है। जवान जनरल कोच में पैर तक नहीं रखते तो सुरक्षा कैसे हो सकती है।

इरफान का कहना है कि यात्रियों के साथ सरकार सौतेले पन का व्यवहार करती है। यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी जीआरपी और संपत्ति की सुरक्षा के लिए आरपीएफ को तैनात किया गया है। अगर यात्रियों की सुरक्षा का जिम्मा जीआरपी के स्थान पर आरपीएफ को दिया जाए तो ट्रेनों में होने वाले अपराध कम हो सकते हैं। आरपीएफ और जीआरपी के बीच तालमेल ठीक न होने के कारण सुरक्षा पर सवाल खड़े होते हैं।

गुलनवाज का कहना है कि ट्रेनों में सुरक्षा के लिए दो के स्थान पर छह पुलिसकर्मियों को तैनात किया जाए। दो बीच में और चार सिपाहियों को आगे पीछे रखा जाए। दो सिपाही ट्रेन यात्रियों की सुरक्षा नहीं कर सकते लेकिन सरकार ऐसा नहीं करना चाहती।

विजय सिंह का कहना है कि लगातार होती घटनाओं के बाद भी न तो रेलवे अधिकारी गंभीर दिखाई देते हैं और न ही आरपीएफ और जीआरपी। ऐसे में यात्रियों को अपनी सुरक्षा स्वयं करनी होगी।
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