महंगाई के तड़के ने बिगाड़ा सब्जियों का जायका

Firozabad Updated Thu, 21 Nov 2013 05:39 AM IST
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फीरोजाबाद। महंगाई के तड़के ने सब्जियों का स्वाद बिगाड़ दिया है। सर्दी के मौसम में सब्जियां सस्ती हो जाती थी, लेकिन इस बार सब्जियों के भाव आसमान पर हैं। टमाटर सेब से भी महंगा बिक रहा है तो सब्जियों का राजा कहे जाने वाले आलू पर महंगाई के चलते सभी सब्जियों की कीमत आसमान छू रही है। बथुआ के रेट इतने हैं कि लोग सुन कर चौंक जाएं।
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सब्जियों पर छाई महंगाई से रसोई का बजट लगातार गड़बड़ा रहा है। आटा-दाल चीनी के भाव तो बढ़े हैं ही, सब्जियां भी अपना रंग दिखा रही हैं। सब्जी विक्रेता कहते हैं कि इन दिनों में सब्जियां सस्ती होनी चाहिए, लेकिन इस बार इन पर महंगाई की मार है। बताए अनुसार सहालग में खपत अधिक होने के कारण सब्जियों के भाव बढ़े हैं। टमाटर ने तो रिकार्ड ही तोड़ दिया, दो दिन पहले टमाटर सौ रुपये किलो तक बिक गया। बुधवार को फुटकर बाजार में इसकी कीमत कहीं 70 तो कहीं 80 रुपये किलो थी। इस सीजन में आने वाला बथुआ इस बार 30 से 40 रुपये किलो बिक रहा है। गत वर्ष इसकी अधिकतम कीमत दस रुपये किलो थी। आलू फुटकर बाजार में 25 से 30 रुपये किलो तक बिक रहा है। मटर 60 रुपये किलो हैै तो गोभी 50 और लौकी 25 से 30 रुपये किलो बिक रही है। सब्जी विक्रेता राम बहादुर और लच्छू कहते हैं सहालग के कारण रेट बढ़े हुए हैं।
मौसम की मार ने बिगाड़ा खेल
प्रमुख आढ़तिया नसीर अहमद का कहना है कि सब्जियों पर मौसम की मार पड़ी है। नया आलू बाजार में काफी देर से आया है। बंगाल से आने वाला आलू मंडी में अभी तक नहीं आया। पंजाब का आलू भी देर से आया है। बरसात और बाढ़ के कारण जिन राज्यों से टमाटर आता है वह भी कम आया है। सब्जी मंडी में यह माना जाता है कि आलू की कीमत पर ही अन्य सब्जियों के रेट घटते-बढ़ते हैं। 15 दिन बाद काफी आलू बाजार में होगा और देशी टमाटर भी आ जाएगा। तब सब्जियों के रेट घटना शुरू हो जाएंगे।

क्या कहते हैं लोग (सभी के हाफ कॉलम फोटो हैं)

गृहणी अलका चतुर्वेदी कहती हैं कि महंगाई तो सभी चीजों पर है। रसोई का बजट गड़बड़ा गया है। पचास रुपये में एक दिन की सब्जी मुश्किल से आ पाती है।

मोहल्ला दुली निवासी प्रदीप दीक्षित कल्लू कहते हैं कि महंगाई की टेंशन ने खाने का स्वाद भी फीका कर दिया है। घर से जो सब्जी लेने की सोच कर बाजार में जाते हैं, भाव सुनकर मजबूरी में दूसरी कम कीमत वाली सब्जी लेकर आना पड़ता है।

मोहल्ला गंज निवासी कुंवर विवेक जैन कहते हैं कि सरकार की गलत नीतियों के कारण हर चीज महंगी है। जमाखोरी और कालाबाजारी ने बाजार का सिस्टम बिगाड़ दिया है। शीतगृह संचालकों ने मुनाफाखोरी के चक्कर में सब्जियों को जानबूझ पर रोक रखा है।

इं. एससी अग्रवाल कहते हैं कि मध्य वर्ग का तो हर तरफ से पिसना है। सरकार सब्जियों के भावों पर भी नियंत्रण नहीं कर पा रही। टमाटर खरीदने के लिए सोचना पडता है। पेंशनभोगियों के लिए तो महंगाई डायन से कम नहीं है।
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