मानवता को किया शर्मसार, दोषियों को मिले फांसी

Firozabad Updated Sun, 23 Dec 2012 05:30 AM IST
फीरोजाबाद। दिल्ली में छात्रा के साथ हुई चलती बस में दुराचार को लेकर शहर में आक्रोश की लहर पैदा हो गई है। विभिन्न छात्र संगठन, सामाजिक संस्थानों के साथ सेवा समिति ने इस अपराध की निंदा की है।
बीएसएस हाईटेक पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्य विनीता शर्मा ने कहा कि अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि चलती बस में घटना को अंजाम दे रहे हैं। फांसी की मांग करने वालों में शिखा दुबे, रजनी शर्मा, पूजा श्रीवास्तव, रजनी श्रीवास्तव आदि थीं। अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार एसो. के नगर अध्यक्ष सचिन दीक्षित ने घटना की निंदा की। मनोज यादव ने कहा कि महिला को भारत में दुर्गा, लक्ष्मी का रुप माना जाता है। उसी भारत में महिलाओं के साथ ऐसा घिनौना व्यवहार किया जा रहा है। निंदा करने वालों में संदीप यादव आदि थे।
सरजीवन नगर में हुई बैठक में महिलाओं के साथ अत्याचार पर लगाम कसने के लिए महिला रक्षा संगठन बनाने का फैसला लिया गया। संगठन के अध्यक्ष विश्व गगनदीप सिंह ने कहा सरकार को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए, जिससे बढ़ते अपराध को रोका जा सके। बैठक में भानु प्रताप सिंह, देश दीपक, विजय सिंह, योगेश कुमार, सुनील पुष्क आदि थे। अखिल भारतीय यादव महासभा की जिलाध्यक्ष भूरी सिंह यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में घटना को लेकर आक्रोश व्यक्त किया गया। कहा गया कि पीड़ित युवती का पाकिस्तान की छात्रा मलाला की तरह विदेश भेजकर इलाज करवाया जाए। बैठक में श्याम सिंह यादव, सुभाष यादव, आदेश यादव आदि मौजूद रहे। जनहित संघर्ष समिति की बैठक में प्रदेश अध्यक्ष घनश्याम गुप्ता कहा कि छात्रा के साथ जिन अपराधियों ने यह घटना को अंजाम दिया है वह मृत्यु दंड के पात्र हैं। उन्होंने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। बैठक में विष्णु शर्मा, अनिल कुमार, साकेत मौजूद थे। जुगन वेलफेयर सेवा समिति के संस्थापक शराफत खान ने कहा बलात्कारियों को किसी भी तरह की रियायत नहीं मिलनी चाहिए। मांग करने वालों में शरफराज, अनीश, अफजाल भाई, अकरम भाई आदि मौजूद रहे।
शांति देवी कालेज की छात्राओं ने किया पैदल मार्च
शिकोहाबाद। शांती देवी आहूजा गर्ल्स कालेज की छात्राओं व अध्यापिकाओं द्वारा दिल्ली गैंगरेप के विरोध में शांति मार्च निकाला गया। डीएम के नाम एक ज्ञापन भी एसडीएम को दिया गया।
जसलई स्थित कालेज से शांति जुलूस प्रारंभ हुआ। जो पालीवाल चौराहा, नारायण तिराहा, पक्का तालाब, तहसील तिराहा होता हुआ एसडीएम कार्यालय पहुंचा। जुलूस में शामिल बीएड छात्राएं हाथों में नारे लिखी तख्तियां लिए हुए जुलूस में चल रही थीं। सबसे आगे प्रबंधक डा. एके आहूजा व डा. संजीव आहूजा, प्राचार्या डा. लतिका सिंह चल रही थीं। जुलूस एसडीएम कार्यालय पहुंचा जहां एसडीएम रविंद्र कुमार की अनुपस्थिति में उनके पेशकार को एसडीएम को संबोधित ज्ञापन दिया गया। ज्ञापन में बलात्कारियों को ऐसी सजा देने की मांग की गई, जिससे उनकी रूह कांप जाए। कहा गया कि ऐसा कठोर कानून बनाकर उसका पालन कराया जाए, जिससे घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
कानून में हो परिवर्तन
फीरोजाबाद। कानून में परिवर्तन होना चाहिए तभी दिल्ली की छात्रा के साथ हुई घटना की पुनरावृत्ति को रोका जा सकता है। क्याेंकि रैप की जिस धारा का वर्तमान में इस्तेमाल किया जाता है, वह दोषी को सजा देने के लिए पर्याप्त नहीं है। रेप की सजा का प्रावधान दस साल का है। दिल्ली जैसा कृत्य करने वालों के लिए कानून में परिवर्तन की आवश्यकता है। फांसी की सजा दी जाए।
अब्दुल सलाम, एडवोकेट।

कानून का भय अपराधियों में खत्म हो गया। इस तरह के कृत्य को रोकने के लिए संगीन धाराएं लागू करनी होगी। इस तरह के मामलों की सुनवाई एक माह के अंदर होने के साथ ही दोषी को सजा मिलनी चाहिए। जितना लंबा समय गुजरता है, उतना ही फायदा अपराधी को मिलता है। ऐसे कृत्य करने वाले अपराधी को फांसी न देकर ऐसी सजा सुनाई जाए जिससे वह जिंदगी भर अपनी गलती पर अहसास करता रहे।
अनूप चंद्र जैन, एडवोकेट।

कानून गवाह और साक्ष्य के आधार पर सजा सुनाता है, लेकिन दिल्ली में जिस तरह से छात्रा के साथ गैंगरेप की घटना हुई, ऐसे मामलों में कानून को सख्त होकर धाराओं में परिवर्तन करना होगा। ऐसा कृत्य करने वाले आरोपियों के लिए केवल फांसी की सजा का प्रावधान होना चाहिए।
लियाकत अली, एडवोकेट।
दिल्ली में लाठीचार्ज पर गुस्साई छात्राएं
लाठीचार्ज मानवाधिकार का हनन
एमजी कालेज की बीए प्रथम वर्ष की छात्रा भावना शर्मा का कहना है कि शीला दीक्षित सरकार को अपनी आलोचना बर्दाश्त नहीं है। गैंगरेप जैसी बड़ी घटना के बाद अगर विरोध प्रदर्शन लोग नहीं करेंगे तो क्या दिल्ली सरकार की आरती उतारेंगे। प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज कर सरकार ने अपनी कलई खोल दी है।

सरकार का गलत रवैया
बीए की छात्रा गुंजन यादव का कहना है कि दिल्ली सरकार ने गलत रवैया अख्तियार किया है। बड़ी घटना का विरोध तो स्वाभाविक है। इससे सरकार बच नहीं सकती है। दिल्ली सरकार पर कार्रवाही होनी चाहिए। वहीं अपराधियों को फांसी की सजा की मांग की है।

पुलिस पर कसें शिकंजा
बीए की छात्रा पूनम कठेरिया का कहना है कि महिलाओं के साथ आम आदमी की स्वतंत्रता पर इस लाठी चार्ज से सवाल खड़े हो गए हैं। सरकार को अपने किए पर माफी मांगनी चाहिए। सुरक्षा के साथ अपराधियों को फांसी की सजा की मांग करने वालों को पुलिस पीट रही है।

सजा ऐसी जो सोच के घबराए
छात्रा पूनम सविता का कहना है कि सरकार को महिलाओं की सुरक्षा के लिए गंभीर होना चाहिए। वह लोग तो अपने हक की लड़ाई लड़ने गये थे। अपराधियों को सजा की मांग जायज है। जिससे लोगों को सबक मिल सके।


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