सेंगर नदी के पानी से खेत लबालब

Firozabad Updated Thu, 20 Dec 2012 05:30 AM IST
नारखी। सेंगर नदी में आए पानी ने आधा दर्जन से अधिक गांवों के किसानों का चैन छीन लिया। दिन रात्रि मेहनत करके बोई फसलों में पानी प्रवेश कर गया। इससे किसानों को लाखों रुपये की चपत लगी। हालांकि पानी खेतों की ओर तेजी से बढ़ता देख किसानों ने नदी पर बने पक्का चेकडेम को तोड़ दिया। ताकि पानी आगे बढ़ सके।
हाथरस माइनर से पानी छोड़ना किसानों के लिए मुसीबत बन गया। क्योंकि पानी ग्राम मछरिया के निकट बने चैकडेम के कारण भरता चला गया। पानी की निकासी नहीं हुई तो पानी का रुख सीधे आस-पास के खेतों की ओर हो गया। किसानों को मंगलवार की सुबह जब खेतों की ओर गए तो पानी भरा देख उनके होश उड़ गए। इतना ही नहीं काफी संख्या में किसान एकत्रित होकर चेकडेम तोड़ने के लिए गांव मछरिया भी पहुंच, लेकिन सफलता नहीं मिली। पानी धीरे-धीरे भीतरी, खेरिया से होकर नारखी ताल्लुका, डोरसा, मुनिया खेड़ा, गढ़ी तोड़िया, एवं कोटला में फसलें प्रभावित करने लगा तो ग्रामीण नहीं मानें। बुधवार को किसानों ने आखिर मछरिया में बने चेकडेम को तोड़ दिया। तभी पानी थम सका।
किसानों ने जिला प्रशासन से पानी भरने से हुए नुकसान का आंकलन करके मुआवजा दिलाए जाने की मांग की है। इधर कोटला के पूर्व प्रधान सुरेंद्रपाल सिंह ने कहा कि प्रशासन को चेकडेम बनाने के साथ ही वहां की स्थिति की निगरानी करनी चाहिए। प्रधान संघ नारखी ब्लाक के प्रतिनिधि राजेश प्रताप सिंह ने चेतावनी दी कि यदि किसानों को मुआवजा नहीं मिला तो आंदोलन किया जाएगा।

चेकडेम तोड़ने को लेकर हुई बहस
नारखी (ब्यूरो)। सेंगर नदीं पर सिंचाई विभाग की ओर से बने चेकडेम का निर्माण कराया गया था। इस चेकडेम को तोड़ने नारखी क्षेत्र के किसान पहुंचे तो मछरिया के ग्रामीणों ने विरोध किया। इस दौरान विवाद काफी बढ़ता इससे पहले कुछ समझदार ग्रामीणों ने समझा बुझाकर मामले को शांत करा दिया।


जब पानी आना चाहिए था तब नहीं छोड़ा गया अब तक खेतों की पलेवट करके बुवाई कर दी तो फसलों को बर्बाद करने के लिए पानी छोड़ दिया गया। अफसरों को चाहिए कि वह नुकसान का आंकलन करके मुआवजा दिलाएं।
चरन सिंह भीतरी

पानी आने के बाद मेड़बंदी करने के साथ ही लेखपाल को भी फोन करके सूचना दी गई, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। चेकडेम बनाया गया था तो पानी कब छोड़ा जाएगा इसका भी ध्यान अफसरों को रखना चाहिए।
निरोत्तम सिंह भीतरी

पांच बीघा गेहूं की फसल पानी में डूब जाने से हजारों का नुकसान हो गया। खेत में की गई पलेवट, बीज के साथ ही मेहनत बेकार चली गई। कोई अधिकारी हमारी ओर ध्यान नहीं देगा।
नाथूराम, किसान।

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