एड्स की चपेट में युवा पीढ़ी

Firozabad Updated Fri, 30 Nov 2012 12:00 PM IST
रोजाबाद। एड्स जानलेवा बीमारी तेजी से पैर पसार रही है। साल दर साल गोष्ठी, जागरूकता कार्यक्रम और संदेश दिए जाते हैं, लेकिन बीमारी का आंकड़ा भी उतनी ही तीव्रता से बढ़ रहा है। जिला अस्पताल से मिले आंकड़े इसकी गवाही दे रहे हैं। वर्ष 2010 के मुकाबले वर्ष 2011 में रोगियों में करीब 20 प्रतिशत की वृद्धि देखी गयी है।
जिला अस्पताल में वर्ष 2010 में हुई दो हजार सात सौ लोगों की जांच में 45 मरीज पॉजीटिव पाये गये। इसमें से 36 पुरुष एवं 9 महिलाएं थी। आगरा एआरटी सेंटर जांच कराने 31 लोग ही गये। जबकि 14 लोगों ने जांच कराना उचित नहीं समझा। इसी तरह वर्ष 2011 में 2608 लोगों की जांच की गयी इसमें से 74 मरीज पाजिटिव निकले। इसमें 54 पुरुष जबकि 20 महिलाएं थीं। 50 लोग एआरटी सेंटर में इलाज के लिये गये। इसी तरह वर्ष 2012 में जुलाई तक के ही सरकारी आंकड़े मिले हैं। जबकि इसमें 174 लोगों की जांच की गयी। इसमें से 23 पाजिटिव मिले। इसमें 18 पुरुष जबकि 5 महिलाएं मिलीं। महिला अस्पताल में 2010 में कुल जांचें 3594 मरीजों की हुई इसमें से 6 पाजिटिव मिले। इसमें से 1 पुरुष 5 महिलाएं थीं। जबकि वर्ष 2011 में 3020 मरीजों की जांच की गयी। इसमें से 30 पाजिटिव रोगी मिले। इसमें से 4 पुरुष जबकि 9 महिलाएं मिलीं। वर्ष 2012 में जुलाई तक के आंकड़ों के अनुसार 1401 मरीजों ने जांचें करायी। इसमें से 5 पाजिटिव रोगी मिले। इसमें से 2 पुरुष 3 महिलाएं मिली।

ज्यादातर ट्रक ड्राइवर एवं मजदूर
चिकित्सकों के अनुसार एड्स की जांच में ज्यातादर पाजिटिव मरीज या तो ट्रक ड्राइवर या फिर मजदूर वर्ग है। जोकि ईट भट्टा आदि में काम करते हैं। जबकि महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान ही पता चल जाता है। निचले तबके की महिलाएं ही पायी गयी है।

बीमारी की चपेट में युवा वर्ग
ज्यादातर बीमारी के मरीज 25 से 40 वर्ष के हैं। वहीं महिलाएं 20 से 30 वर्ष के बीच हैं, चिकित्सकों के अनुसार जिला अस्पताल के मरीजों में इसी उम्र के लोगों के ही सैंपल ज्यादा आ रहे हैं।

क्या होता है एआरटी सेंटर
एआरटी सेंटर में एंटी वायरस ड्रग से एड्स के मरीजों का उपचार किया जाता है। यह एचआईवी वायरस को कंट्रोल में लाते हैं। इससे वायरस का प्रभाव कमकर मरीज की उम्र बढ़ जाती है।

जांच के लिये किट खत्म
सरकार जहां एड्स के प्रचार प्रसार में करोड़ों रुपये बहा रही है वहीं जिला अस्पताल में एड्स रोगियों की जांच के लिये किट ही मौजूद नहीं है। किट के अभाव में सैकड़ों लोगों की जांच तो रह जाती है, जो गलत है।

मरीजों की बढ़ती संख्या चिंताजनक है। एड्स रोगियों में ज्यादातर निचले तबके के हैं। इसके प्रचार प्रसार के लिये सरकार काफी सजग है। लोगों को सावधानी बरतने की हर संभव कोशिश करनी चाहिए।
एड्स विभाग के नोडल आफिसर डा. एके मित्तल।

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