करोेख्च के बाद भी बढ़ रहा कुपोषण

Firozabad Updated Fri, 09 Nov 2012 12:00 PM IST
इस तरह से करते हैं निर्धारण
जिला कार्यक्रम अधिकारी रामलखन आर्य के अनुसार कुपोषित एवं अति कुपोेषित बच्चों का चयन डब्ल्यूएचओ के मानक के आधार पर होता है। बच्चों का वजन करते समय यदि ग्रीन (हरा) तक बच्चा सामान्य श्रेणी में रहता है। यलो (पीला) में तो कुपोषित होने की श्रेणी में माना जाता है। यदि रैड है तो अति कुपोषित श्रेणी में रहता है।

जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य
फीरोजाबाद (ब्यूरो)। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की जांच रिपोर्ट काफी चौंकाने वाली है। विभाग भले ही कुपोषित बच्चों की संख्या 900 के करीब बताता रहे परंतु यह संख्या तो अति कुपोषित बच्चों की थी। कुपोषित बच्चे तो एक लाख से अधिक हैं जो चिंता का कारण है। इधर डीपीओ का कहना है कि कुपोषित बच्चे सुधार हो जाता है इसके कारण चिंता नहीं रहती। अतिकुपोषित बच्चे की मानीटरिंग होना आवश्यक है। अब देखना है विभाग क्या सावधानी बरतेगा।

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