स्कूलों के खाते सीज

Firozabad Updated Fri, 02 Nov 2012 12:00 PM IST
फीरोजाबाद (ब्यूरो)। टूंडला में संचालित मां सरस्वती स्कूल में 38 लाख रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति राशि का घपला उजागर होने पर हड़कंप मचा हुआ है। जिला समाज कल्याण अधिकारी ने डीएम के निर्देश पर टूंडला तहसील क्षेत्र के सभी मान्यता प्राप्त स्कूलों के छात्रवृत्ति के खाते सीज करने के आदेश दिए हैं।
तेलमील रोड नई बस्ती में संचालित मां सरस्वती पब्लिक स्कूल में पिछड़ा वर्ग के छात्रों की छात्रवृत्ति राशि को स्कूल प्रबंधक ने अपने सात खातों में जमा कर रखा था। छात्रवृत्ति राशि बच्चों को पिछले कई सालों से बांटी नहीं गई थी। शिकायत के बाद जांच हुई तो परत दर परत मामला खुलता चला गया। कार्रवाई के दौरान तीन खातों का विवरण ही नहीं मिल सका। विभाग इनकी भी डिटेल तैयार करने की तैयारी में जुटा है। 38 लाख से अधिक की धनराशि चार खातों में मिली है। अभी तीन और खातों की जांच की जानी है। इन खातों की जांच के बाद घपले राशि और अधिक बढ़ सकती है। स्कूल के एसबीआई टूंडला में संचालित खाते में 3.50 लाख, एसबीएडीवी टूंडला के दो खातों में 12,90,300 रुपये, जिला सहकारी बैंक टूंडला के खाते में 21,98,400 रुपये मिले हैं। कैनरा बैंक टूंडला, इलाहाबाद बैंक टूंडला के साथ ही पोस्ट ऑफिस टूंडला में चल रहे खातों का विवरण जांच टीम को नहीं मिल सका है। घपला उजागर होने पर जिला समाज कल्याण अधिकारी ने डीएम के निर्देश पर टूंडला तहसील क्षेत्र के सभी मान्यता प्राप्त स्कूलों के छात्रवृत्ति के खाते सीज करने के आदेश दिए हैं। इस आदेश के बाद स्कूल संचालकों में हड़कंप मचा हुआ है।

अफसरों की जांच पर लगा प्रश्नचिन्ह
फीरोजाबाद। 38 लाख से अधिक की छात्रवृत्ति का घपला उजागर होने के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं। छात्रवृत्ति वितरण का सत्यापन चार वर्षों तक कागजों पर ही होता रहा। सत्यापन को जाने वाले अफसरों ने खातों को चेक क्यों नहीं किया। बिना छात्रों से पूछताछ किए ही अपनी रिपोर्ट लगा दी। इन अफसरों की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में है। विभाग की मिलीभगत से इंकार नहीं किया जा सकता। आखिर विभाग अलग-अलग खातों में छात्रवृत्ति की धनराशि क्यों भेजता रहा। सबसे अहम सवाल है कि प्रशासन अब अन्य स्कूलों की भी जांच कराएगा, जिससे हकीकत सामने आ सके।

फीडिंग भी सवालों के घेरे में
फीरोजाबाद(ब्यूरो)। छात्रवृत्ति की गड़बड़ी काफी हद तक उस समय रुकना शुरू हो गई जब वर्ष 2007 से डाटा फीडिंग का काम शुरू हुआ। छात्रों के नाम पता सभी इंटरनेट पर दिखाई देने लगे। इसके साथ ही स्कूल के एक खाते में धनराशि जाने लगी। अब 38 लाख से अधिक धनराशि के हुए घपले के बाद फीडिंग भी सवालों के घेरे में है।

पुराने शिक्षक ने खोल दी पोल
फीरोजाबाद(ब्यूरो)। लंबे अर्से से पढ़ाने वाले शिक्षक को स्कूल से हटाया तो उसने पोल खोल दी। उसने शिकायतकर्ता को न सिर्फ खाते संख्या मुहैया कराए पत्रांक संख्या तक बता दी।

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