शोहदों का आतंक, बेटियां असुरक्षित

Firozabad Updated Sat, 29 Sep 2012 12:00 PM IST
फीरोजाबाद। लाल दुपट्टे वाली.. कहां चली पीछे मुड़ के फिल्मों के ये मनभावक गीतों की पंक्तियां स्कूल, कालेज की छात्राओं के लिए फब्तियां बन गई हैं। आए दिन बढ़ती छेड़छाड़ की घटनाओं ने लड़कियों व अभिभावकों को परेशान कर दिया है लेकिन पुलिस महकमा आंखें बंद कर बैठा है। पुलिस की सजगता इस बात से पता चलती है तीन माह में केवल आठ मामले ही छेड़छाड़ के पंजीकृत किये है। कई शिकायतों को तो ले देकर निपटारा कर देते हैं। महिलाओं के साथ बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिये कोई महिला सेल नहीं है। जिससे अपराधी के हौसले बुलंद है।
सीन-एक
शुक्रवार दोपहर करीब 12 बजे एमजी कालेज के बाहर बाइक सवार छात्रों का झुंड। सिगरेट के छल्ले उड़ाते कालेज से आ रही छात्राओं से स्टाइल मारना। इसके बाद उस पर फब्तियां कसना। छात्रा ने पीछे मुड़कर देखा इस पर लड़कों ने अश्लील इशारा किया। पुलिस बल आस पास मौजूद नहीं। वह दबे पांव चली गयी।
सीन-दो
जलेसर रोड चौराहा दाऊ दयाल कालेज जाने वाली छात्राओं का जमावड़ा। ठीक सामने दूसरी ओर तीन अलग अलग युवकों का झुंड। एक लड़का बाइक से आता है। सामने से बाइक तेज लाकर लड़कियों के सामने स्टंटकरता है। इसके बाद लड़की से बैठने को कहता है। इस पर लड़कियां वहां से दूर चली जाती है। रोजाना यह इस चौराहे पर देखने को मिल सकता है।
क्या कहना है छात्राओं का
नगर के एक प्रतिष्ठित स्कूल की छात्रा ने बताया महिला पुलिस चौराहों पर न दिखने से लड़कियां शिकायत करने में परहेज करती है। घर में शिकायत करने पर अभिभावक कालेज जाने से मना कर देते हैं। एक अन्य छात्रा ने बताया एक बार उसके साथ छेड़खानी हुई थी, लेकिन उसने पुलिस से शिकायत करने के बजाए खुद ही आरोपी को सबक सिखाया। अगर पुलिस को बताती तो आरोपी को सबक नहीं मिल पाता।
क्या कहते हैं अभिभावक
फीरोजाबाद (ब्यूरो)। अभिभावकों का कहना है कि छेड़छाड़ के मामले को बाहर ले जाने से घर की प्रतिष्ठा घटती है। इसलिए चुप रहने में भलाई होती है। पुलिस खास कदम नहीं उठाती है। इसलिए थाने नहीं जाते हैं।

बेपरवाह हो गई पुलिस
फीरोजाबाद (ब्यूरो)। भले ही रोजाना छेड़खानी के दो से तीन मामले हो रहे है, लेकिन थाने में पंजीकृत आंकड़ा कुछ अलग ही है। पिछले तीन माह में केवल महिला थाने में आठ मामले ही सामने आये है। जिसमें किसी की धरपकड़ नहीं हुई है।

पूरे जिले में 30 महिला कांस्टेबल
फीरोजाबाद (ब्यूरो)। युवतियों से छेड़खानी के मामले में कार्रवाई करने में महिला कांस्टेबल की कमी अखरती है। जिले में कुल 30 महिला कांस्टेबल ही है। जोकि बहुत कम है।

क्या कहती है एसपी
फीरोजाबाद (ब्यूरो)। एसपी अर्पणा कुमार का मानना है कि जहां पुलिस नहीं है वहां छेड़खानी होती है तो उसको तुरंत सबक सिखाना चाहिये। चुप रहने से प्रोत्साहन मिल जाता है। थाने में आकर उसकी शिकायत भी दर्ज करानी चाहिए क्योंकि गलत काम किसी और ने किया है। इसमें लड़कियों की प्रतिष्ठा नहीं घटती है।

पिछले दिनों घटी घटनाएं
-27 सिंतबर को गांधी पार्क पर स्कूल जा रही लड़कियों से शोहदों की छेड़खानी, गालीगलौज।
-27 सिंतबर फायर स्टेशन के पास कालेज जा रही लड़कियों का बाइक सवारों ने दुपट्टा खींचा।
-26 सिंतबर को बाजार में दो महिलाओं से शोहदों की अभद्रता, गाली गलौज।
-23 सिंतबर को जिला अस्पताल के बाहर एक युवक ने युवती को छेड़ा। बात बढ़ने पर भागा।

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