‘संग्रह सिकंदर जैसा तो त्याग महावीर जैसा

Firozabad Updated Fri, 28 Sep 2012 12:00 PM IST
टूंडला (ब्यूरो)। संग्रह करो तो सिकंदर जैसा व त्याग करो तो महावीर जैसा। बिना त्याग के जीवन निर्वाह नहीं हो सकता। दान पाप के ब्याज को चुकाता है और त्याग पाप को जड़ से नष्ट करता है। इसलिए अपनी आय का दसवां भाग दान अवश्य करें। यह प्रवचन श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर ऋषभपुरी में पर्यूषण पर्व पर आयोजित समवशरण महामंडल विधान के दौरान आर्यिका गुरुनंदनी माताजी ने दिए।
उन्होंने कहा कि भगवान महावीर ने तीन पात्र बताए हैं, उत्तम, मध्यम व जघन्य। उत्तम पात्रों को दान देने से भोग भूमि की प्राप्ति होती है। इसी तरह धन की भी तीन गति दान, भोग, नाश हैं। उन्होंने कहा कि जैन साधुओं के कमंडल का भी एक अर्थशास्त्र है। जिस प्रकार कमंडल में संग्रह का स्थान तो बहुत है किंतु पानी निकलने का मार्ग छोटा है, उसी प्रकार शक्ति अनुसार आय व व्यय करें। इस अवसर बाहुबली युद्ध का नाट्य मंचन किया गया।

फोटो-टूंडला के श्रीआदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में प्रवचन करतीं आर्यिका गुरुनंदिनी माताजी-5

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