नाव कागजों की समंदर में चलेगी कब तक

Firozabad Updated Mon, 27 Aug 2012 12:00 PM IST
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फीरोजाबाद (ब्यूरो)। चौबे कमलापति की धर्मशाला में अहमद हसीन की याद में मुआयरे का आयोजन किया गया। इसमें शायरों ने अपनी गजलों और गीतों के जरिए उन्हें याद किया।
अर्जुन सिंह चतुर्वेदी की अध्यक्षता में आयोजित मुशायरे में शमा फरोजा अरविंद चतुर्वेदी ने की तथा उस्ताद हसीन अहमद की तस्वीर की नकाब कुशाई हामिद हुसैन हामिद ने की। संचालन हरीश चतुर्वेदी ने किया। इस मुशायरे में अनवर कमाल ने पढ़ा कि सरफिरी मौजों के लश्कर में चलेगी कब तक, नाव कागज की समंदर में चलेगी कब तक। पीएन चतुर्वेदी दास ने कहा कि चमन में उड़ गई फूलों की गर्दन, चली वादे सबा तलवार बनकर। हबीब अहमद ने पढ़ा कि धूप जब आई मशाईल की हमारे सर पर, दूर होने लगी परछांइया रफ्ता रफ्ता। हरीश चतुर्वेदी ने पढ़ा कि जल रहे हैं जो तेज आंधी में, उन चरागों का एहतराम करो। वाहिद हुसैन ने पढ़ा कि एहसान अपने सर पै न लेंगे रकीब का, कैसे बनेगी बात हमारी नजर में है। जाकिर भूपतपुरी ने पढ़ा कि मुझे दफना दिया तो कब्र बोली, बहुत इतरा रहा था आ गया न। मुशायरे में नसीम अनवर, डा. प्रकाश बंसल, जकी नाजुकी, चाहत कामिल, अनपढ़ साहब आदि ने शायरी पेश की।

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