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चुनावी शोर में दब गया प्रदूषण का मुद्दा

Agra Bureauआगरा ब्यूरो Updated Fri, 19 Apr 2019 11:57 PM IST
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polution - फोटो : amar ujala
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फिरोजाबाद। सुहागनगरी का प्रमुख कांच उद्योग भले ही देश-विदेश में विख्यात है, परंतु बढ़ता प्रदूषण साख को बट्टा लगा रहा है। बढ़ते प्रदूषण को लेकर उद्योगों पर कई बंदिशें लगा दी गईं। एनजीटी से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मामला पहुंच गया, लेकिन जनप्रतिनिधियों ने प्रदूषण के मुद्दे को लेकर कभी आवाज नहीं उठाई।

फिरोजबाद में नेचुरल गैस से कांच इकाइयों का संचालन हो रहा है। इसके बावजूद बढ़ते प्रदूषण के कारण खुली हवा में सांस लेना मुश्किल है। प्रदूषण कम करने को भले ही करोड़ों रुपये खर्च हो गए। कांच उद्योग पर कई बंदिशें लग गईं, परंतु शहर की आबोहवा में घुल रहे प्रदूषण का मानक कम नहीं हो रहा।

वर्तमान में फिरोजाबाद उन चुनिंदा शहरों में शामिल हैं, जहां सर्वाधिक प्रदूषण है। प्रदूषण कम करने को पर्यावरण मंत्रालय, एनजीटी, टीटीजेड अथॉरिटी के लगातार दिशा निर्देश हैं, परंतु जिम्मेदार अफसर उन पर अमल कराने में रुचि नहीं लेते। यह मामला जनप्रतिनिधियों तक भी पहुंचा, परंतु उन्होंने कभी गंभीरता नहीं दिखाई।

फाइलों में ही कैद होकर रह गया एक्शन प्लान
एनजीटी ने प्रदूषण कम करने के लिए एक्शन प्लान तैयार करने के आदेश दिए थे। टीटीजेड अथॉरिटी ने प्रदूषण कम करने को एक्शन प्लान भी बना। आरटीओ, यातायात, वन विभाग, जलनिगम, नगर निगम, विकास प्राधिकरण, पीडब्लूडी सहित एक दर्जन से अधिक विभागों को एक्शन प्लान पर कार्य करने की जिम्मेदारी सौंपी गई, परंतु एक्शन प्लान फाइलों तक ही सिमट कर रह गया।

कारखानों में नहीं लगी प्रदूषण रोधी डिवाइस
सुहागनगरी में बढ़ते प्रदूषण की जिला प्रशासन ने नीरी के वैज्ञानिकों से प्रदूषण के वास्तविक कारणों की जांच कराई। नीरी ने 125 पेज की स्टडी रिपोर्ट में सुझाव दिया था कि कांच उद्योग से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए सभी कारखानों में वायु प्रदूषण रोधी डिवाइस लगवाई जाए। टीटीजेड व उद्योग बंधु में मामला उठा, परंतु आजतक किसी कारखाने में डिवाइस स्थापित नहीं हो सकी।

हाईवे, ओवरब्रिज के नीचे, सरकारी विभागों में जलता है कूड़ा
एनजीटी के कूड़ा जलाने पर जुर्माने का प्रावधान है। नगला भाऊ स्थित औद्योगिक क्षेत्र में आए दिन कूड़ा जलते हुए देखा जा सकता है। यही हाल हाईवे, सर्विस रोड, ओवरब्रिज नीचे, सार्वजनिक स्थलों पर नजर आता है। सरकारी विभाग हों या प्राइवेट कार्यालय यहां भी आए दिन कूड़ा जलता है।

उद्योगपति अजय सिंघल कहते हैं कि प्रदूषण के नाम पर सिर्फ कारखाना संचालकों पर शिकंजा कसा जाता है। जबकि अब मानक इतने सख्त कर दिए हैं कि उद्योगों से प्रदूषण नहीं हो रहा। प्रदूषण के जो अन्य कारण हैं उन पर अंकुश लगना चाहिए।
  • - सीए कुशल गुप्ता का कहना है कि शहर में उद्योग के अलावा कूड़ा जलने, भट्टियां, सड़क बनने से काफी प्रदूषण होता है, इस प्रदूषण को रोकने को आजतक ठोस योजना नहीं बनी।
  • - प्रो. एबी चौबे का कहना है कि बढ़ता प्रदूषण आमजन के स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। आजतक किसी जनप्रतिनिधि ने प्रदूषण को मुद्दे को गंभीरता से नहीं उठाया।
  • - डा. राजेंद्र कुलश्रेष्ठ का कहना है कि शहर में बढ़ता प्रदूषण हर किसी के लिए खतरे की घंटी है। प्रदूषण कम करने के लिए हम सभी को मिलकर ठोस प्रयास करने होंगे।
  • - दवा व्यापारी विजेंद्र यादव का कहना है कि शहर में लगातार प्रदूषण बढ़ने से बीमारियां हो रही हैं, लेकिन प्रदूषण कम करने को लेकर उद्यमी व अधिकारी गंभीर नहीं है।

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