जिसकी यादों में महक जाते हैं जेहन में गुलाब.....

Kanpur	 Bureauकानपुर ब्यूरो Updated Thu, 29 Oct 2020 12:41 AM IST
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बालाजी संस्थान की ओर से कवि गोष्ठी का आयोजन हुआ। मशहूर शायर इंजीनियर वासिफ फारुकी ने कार्यक्रम का संचालन किया।
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रचनाकारों ने अपनी रसों को कविताओं के माध्यम से श्रोताओं के सामने प्रस्तुत की। वरिष्ठ शायर वारिस अंसारी ने पढ़ा जिसकी यादों से महक उठते हैं जेहन में गुलाब, जिसके चर्चे हो तो रंगीन सी शाम आती है।
आज उसी शख्स की है यौमे विलादत वारिस, जिसकी निस्बत हमें हर मोड़ पर काम आती है। कवि व शायर शिवशरण बंधु ने पढ़ा अब कोई भी कमी नहीं खलती, दिल को सूखी नदी नहीं खलती।
प्यास पानी की हो या होठों की, किसी को ये तश्नगी नहीं खलती। युवा कवि व शायर शिवम हथगामी ने पढ़ा हम तेरा प्यार ओढ़ लेते हैं, गम का बाजार ओढ़ लेते हैं। तन बिछाते हैं ये थके मजदूर और अखबार ओढ़ लेते हैं।
कवि एवं फिल्मकार शिव सिंह सागर ने पढ़ा मेरी फटी कमीज के चलते दर्जी हो गए मेरे पापा, जब जब मेरी चप्पल टूटी, मोची हो गए मेरे पापा।
अनुज साहू शम्स ने पढ़ा तेरे ख्याल के जद्दोजहद में जिंदा हैं, वरना हम तो बहुत पहले मर गए होते। दोहाकार राजेंद्र यादव ने पढ़ा मौत सभी को भोगना, जान रहे सब लोग, अडंबर के नाम पर मिट जाते हैं लोग।
इस मौके पर राकेश साहू, अचल सिंह, मसर्रत अली, अंबुज मोदनवाल, तिलक मोदनवाल, अमन मोदनवाल मौजूद रहे।
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