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इंजीनियर हत्याकांड: ठेकेदार पर पुलिस की टिकी निगाह

अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 20 May 2019 12:24 AM IST
police official investigating
police official investigating - फोटो : police official investigating
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 इंजीनियर अजय हत्याकांड में पुलिस का दावा है कि वह खुलासे से चंद कदम दूर है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि हत्याकांड के पीछे एक ठेकेदार की साजिश सामने आई है। वारदात के बाद उसका मोबाइल भी बंद चल रहा है। पुलिस मान रही है कि उसके इशारे पर पूर्वांचल के शूटर ने कुछ स्थानीय लोगों के साथ मिल कर घटना को अंजाम दिया।
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फिरोजाबाद के शिकोहाबाद थाने के रामनगर निवासी अजय सिंह रेलवे फ्रट कोरीडोर निर्माण कंपनी जीएमआर के इंजीनियर थे। चौदह मई को साइट जाते समय रास्ते में गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई थी। दिनदहाड़े वारदात पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती है। पुलिस टीमें 21 ठेकेदारों की जांच में जुटी हैं। इनमें एक ठेकेदार का मोबाइल बंद होना सामने आया। ठेकेदार का मोबाइल इंजीनियर की हत्या के बाद से बंद होने का क्लू मिला है। काफी प्रयास के बाद भी ठेकेदार का किसी से कोई संपर्क नहीं हुआ। ठेकेदार से संपर्क न होने से पुलिस का शक धीरे-धीरे यकीन में बदल गया है। हाथ आए एक बदमाश ने भी ठेकेदार का राजफाश किया है। पुलिस ठेकेदार की तलाश में उसके जिले में डेरा डाले हुए है। उसके हाथ आने का इंतजार कर रही है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक ठेकेदार और इंजीनियर के बीच करीब तीन माह से विवाद चल रहा था। इस ठेकेदार के पास सात पुलों का काम है। कुल काम करीब दो करोड़ रुपयों का है। पुुलों का काम अंतिम कगार पर है। काम का काफी भुगतान भी ठेकेेदार ले चुका था। उनके बीच विवाद इतना बढ़ गया था कि एक दूसरे से बातचीत भी बंद हो गई थी। ठेकेेदार को शायद आगे काम के भुगतान न होने अंदाजा था। माना जा रहा है कि तभी उसने इंजीनियर हत्याकांड की बड़ी साजिश रच डाली।
 
 
इंजीनियर और ठेकेदार एक दूसरे के काफी करीबी थे। दोनों तांबेश्वर नगर इलाके में करीब तीन सौ मीटर एरिया के आसपास रहते थे। वह पहले एक साथ साइट भी आते-जाते थे। कुछ दिनों से अलगाव के पीछे की बात जीएमआर प्लांट में काम करने वाले इंजीनियर के साथियों के बीच तेज हो गई थी।
 
वारदात के बाद से ठेकेदार का कोई पता नहीं लग रहा है। उसके अंडर में काम करने वाले सैकड़ों मजदूरों का हाल बेहाल है। वह प्लांट छोड़ने को मजबूर हो गए हैं। उनके पास घर आने जाने का खर्च भी नहीं है। मजदूरों को ठेकेदार एक पखवारे में भुगतान करते थे। उनका रुपया भी दबाए रखते थे।
 
जीएमआर प्लांट रविवार को थरियांव सीओ रामप्रकाश दोपहर को पहुंचे। करीब एक घंटे तक प्रोजेक्ट मैनेजर श्रीकांत से पूछताछ की। इस दौरान ठेकेदार और उससे जुड़े लोगों के बारे में पूछताछ की गई है। वारदात के बाद से जीएमआर के सिस्ट्रा एजेंसी के तहत काम करने वाले इंजीनियर की टीम प्लांट में नहीं जा रही है। कुछ इंजीनियर दहशत में है और कई पुलिस की पूछताछ में फंसने से बच रहे हैं।

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