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फतेहपुर: मौरंग खनन के नेटवर्क में शामिल लोग अंडरग्राउंड

Kanpur	 Bureauकानपुर ब्यूरो Updated Fri, 12 Jul 2019 12:45 AM IST
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फतेहपुर। मानकों और आदेशों को दरकिनार कर करीब चार साल तक जिले में मौरंग खनन हुआ है। तीन साल से चल रही जांच को सीबीआई फाइनल टच देने में जुटी है। बुधवार को केंद्रीय जांच एजेंसी की कार्रवाई के बाद खनन में शामिल रहे लोगों में दहशत का माहौल है। कुछ जिला छोड़कर निकल गए है। वह हर हाल में सीबीआई टीम की पूछताछ से बचना चाहते हैं।
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सपा शासनकाल में गलत तरीके से मौरंग खदान में पट्टों का आवंटन होने का आरोप है। मामले की 2016 से जांच शुरू हुई। जिले में पहली बार डेढ़ साल पहले सीबीआई टीम आई थी। साक्ष्य जुटाने के लिए जांच अधिकारी चार दिन तक जिले में मौजूद रहे। मौरंग खदानों के संचालकों, पट्टाधारकों, सिंडीकेट से जुुड़े लोगों से लंबी पूछताछ की गई थी। सूत्रों का कहना है कि पट्टाधारकों को सीबीआई ने करीब छह माह पहले लखनऊ भी बुलाया था। जांच को
अंतिम रूप में देने में लगी टीम ने बुधवार को भी छापा मारा था। पांच मौरंग खंड के पट्टेधारक प्रत्यक्ष रूप से सीबीआई की जांच में आए थे। अप्रत्यक्ष रूप से कई बड़े नाम मौरंग खनन में शामिल हैं। यह लोग सीधे तौर पर सीबीआई के रडार पर नहीं आए। ओहदेदार और सीधा कनेक्शन न होने की वजह से फिलहाल बचे हैं। बुधवार को कार्रवाई के बाद मौरंग कारोबारियों को हड़कंप दिखा। उनके मोबाइल स्विच ऑफ बताने लगे हैं। घरों में ताला बंद है। आसपास के लोग उनके बाहर घूमने जाने की बात बता रहे हैं।
सिंडीकेट ने कराया खनन एफआईआर झेल रहे किसान
कोर्रा खंड में 2014 में अवैध खनन हुई थी रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
फतेहपुर। मौरंग माफिया और प्रशासनिक अमले के बीच तगड़ा गठजोड़ रहा है। कहा जा रहा है कि डीएम अभय के कार्यकाल में परमिट पर सिंडीकेट हावी रहा। खनन को लेकर सवाल उठने पर उल्टे किसानों पर एफआईआर दर्ज हुई थी। किसी माफिया, पट्टाधारक व सिंडीकेट के सदस्यों का नाम सामने नहीं आया। एफआईआर का दंश पांच साल बाद भी ग्रामीण झेल रहे हैं।
जिले में खनन की अनुमति दिखावा रही है। पूरी कमान सिंडीकेट के हाथों में रही है। थाने से लेकर बड़े अधिकारियों तक सिंडीकेट की चली थी। कोर्रा खंड में किसानों की जमीन पर खनन हुआ था। तत्कालीन खनन अधिकारी एसके सिंह की ओर से करीब 15 किसानों पर एफआईआर दर्ज कराई गई थी। किसान इच्छाराम सिंह, अर्जुन सिंह, जगमोहन सिंह, कृष्णपाल सिंह, नवाब सिंह, जिलेदार सिंह, रामलाल सिंह के खिलाफ पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की थी। यह लोग पांच साल बाद भी कोर्ट के चक्कर काट रहे हैं। इनके खिलाफ खनिज संपदा निवारण अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई थी। किसान इच्छाराम सिंह ने बताया कि उनकी जमीन पर जबरन खनन किया जाता था। उन लोगों के आपत्ति जताने पर रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।

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