दूषित पानी और गंदगी से घर-घर मरीज

Fatehpur Updated Tue, 02 Oct 2012 12:00 PM IST
फतेहपुर। कहते हैं जल ही जीवन है, लेकिन जब उसी जल की सेहत पर ध्यान न दिया जाए तो हमारे-आप के जीवन के लिए यह जानलेवा साबित होता है। जिले में कुछ ऐसा ही हाल है। ज्यादातर मुहल्लों में दूषित जलापूर्ति के कारण लोगों को तीन तरह की बीमारियों से जूझना पड़ रहा है। कोई उल्टी-दस्त से जूझ रहा है, तो कोई बुखार से। इतना ही नहीं दूषित पानी पीने के कारण लोग पथरी जैसी बीमारी से भी पीड़ित हैं। इन दिनों जिला अस्पताल में तीनों बीमारियों से पीड़ित रोगियों की बाढ़ आई हुई है। इसके अलावा मौसमी बीमारियां कहर बरपा रहीं सो अलग। इसके बावजूद प्रशासन लोगों को शुद्ध पीने का पानी मुहैया कराने को लेकर कतई गंभीर नहीं है।

मरीजों की संख्या के
आगे संसाधन नाकाफी
- जिला अस्पताल के सभी वार्ड फुल
- बुखार, उल्टी-दस्त के मरीज सबसे ज्यादा
- पानी उबालकर पीने की चिकित्सकीय सलाह
फतेहपुर। जिला अस्पताल में इन दिनों 1000 से 1100 सौ के बीच में रोगियों का प्रतिदिन पंजीयन हो रहा है। इनमें बीस से पच्चीस फीसदी रोगी उल्टी-दस्त से पीड़ित आते हैं। इस बीमारी से गंभीर रूप से पीड़ित रोगी प्रतिदिन ढाई से तीन दर्जन के बीच जिला अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं। डा. नलनीश पांडेय का कहना है कि पेट से संबंधित अधिकांश बीमारियां दूषित पानी पीने से होती हैं। उल्टी-दस्त की फैल रही बीमारी दूषित पानी पीना प्रमुख कारण है। डाक्टर का कहना है कि वर्तमान समय से पानी उबालने के बाद ठंडा करके पीने से बहुत कुछ समस्या से निजात पाई जा सकती है। इसके बाद भी अगर शिकायत होती है, तो शरीर में पानी की कमी न होनें दें और इलाज कराएं कराएं। जिला अस्पताल में इन दिनों बुखार रोगियों की भरमार है। पंजीयन कराने वाले रोगियों में चार से पांच सौ बुखार से पीड़ित होते हैं। जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक बीएन द्विवेदी का कहना है कि बुखार संक्रामक होने का कारण दूषित पेयजल है। उनका मानना है कि खासकर शहरवासी ज्यादातर दूषित पानी पी रहे हैं। इसी लिए उनको संक्रामक बुखार से जूझना पड़ रहा है। उन्होंने लोगों को पाइप लाइन से मिलने वाला पानी उबालकर पीने की सलाह दी और इसके बावजूद अगर बुखार आता है, तो डाक्टर की सलाह रक्त की जंाच कराने के बाद ही इलाज करने को कहा।

दूषित पानी पीने से पथरी की बीमारी
- गुर्दा, पित्ताशय पर भी हमला
फतेहपुर। जिले में दूषित पानी पीने के कारण पेट में पथरी रोगियों की संख्या बढ़ रही है। जिला अस्पताल में हर महीने के बीस से पच्चीस रोगियों के पथरी के आपरेशन किए जा रहे हैं।
जिला अस्पताल के वरिष्ठ सर्जन डा. डीके वर्मा का कहना है कि पानी के साथ गंदगी पेट में जाने के कारण गुर्दा, पित्ताशय आदि में पथरी बन जाती है। अगर लोगों को शुद्ध पीने का पानी पीने को मिले, तो इस बीमारी से बचा जा सकता है। उनका कहना है कि शुद्ध पानी पीने से तमाम तरह की बीमारियों से बचा जा सकता है। उन्होंने पेट में अक्सर दर्द होने पर पथरी के लक्षण बताए और रोगी को तत्काल सर्जन डाक्टर से परामर्श लेने की सलाह दी।

गंभीर मर्ज के जांचों
की कोई व्यवस्था नहीं
फतेहपुर। जिले में चिकित्सीय सुविधाओं का टोटा है। विशेषज्ञ डाक्टरों की निहायत कमी है और गंभीर बीमारियों की जांच की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसी हालत में बड़ी तादाद में गरीब रोगियों को उपचार के अभाव में काल के ग्रास में समाना पड़ रहा है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग इस दिशा में कोई पहल नहीं कर रहा है।
ग्रामीण क्षेत्र के अस्पतालों में डाक्टरों के न बैठने के कारण रोगियों को झोला झाप डाक्टरों की शरण लेना मजबूरी है। जिला अस्पताल में ईएनटी सर्जन, कार्डियोलाजिस्ट, हार्ट विशेषज्ञ डाक्टरों की व्यवस्था नहीं है। इतनी ही नहीं गंभीर मरीजों के लिए अस्पताल में आईसीयू तक की व्यवस्था नहीं है। इतना ही नहीं थाईराइड , कैंसर, डेंगू जैसी बीमारियों की जांच के लिए संसाधान नहीं है।
चिकित्सीय संसाधनों की कमी का खामियाजा गरीब रोगियों को अधिक भुगतना पड़ रहा है। संपन्न परिवारों के रोगी तो बाहर जाकर जांच और इलाज करा लेते हैं, जबकि गरीब परिवारों के रोगी बिना जांच कराए ही इलाज कराते रहते हैं। मुख्य चिकित्साधिकारी केएल वर्मा का कहना है कि जिले में अत्याधुनिक चिकित्सीय सुविधाएं मुहैया कराने के लिए शासन को समय-समय पर लिखा जाता है। डाक्टरों की कमी से शासन को अवगत कराया जा चुका है। जल्द ही जिला अस्पताल में विशेषज्ञ डाक्टरों की नियुक्ति हो जाएगी।

‘सभी नलकूपों में लगे हैं माइक्रो डोजर’
फतेहपुर। जलकल विभाग के अवर अभियंता गौरीशंकर पटेल का कहना है कि नगर पालिका ने सभी नलकूपों में माइक्रो इलेक्ट्रानिक डोजर लगा रखे हैं जिनके माध्यम से जलापूर्ति में क्लोरीन मिलकर विसंक्रमण किया जाता है। जलापूर्ति के नमूने भरने के बाद परीक्षण की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की है। जलकल विभाग का पूरा प्रयास उपभोक्ताओं को पीने का शुद्ध पानी उपलब्ध करना है।

इंसेट
स्वास्थ्य विभाग ने कसी कमर
फतेहपुर। मुख्य चिकित्साधिकारी केएल वर्मा ने कहा कि संक्रामक रोगो को देखते हुए जिला स्तरीय संक्रामक रोग नियंत्रण कक्ष मे तीन टीमें लगातार संक्रामक रोगो से बचाव हेतु प्रभावी कार्यवाही कर रही है और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र की टीमें मौके पर उपचार भी कर रही है । उन्होंने बताया कि मलेरिया व डेंगू से मिलने वाले रोगियो का तुरंत इलाज किये जाने क ी व्यवस्थाएं है। संक्रामक बीमारी के बारे में मोबाइल नंबर 945445143व 9236103345 में दी किसी भी समय दी जा सकती है।

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