समूचा जिला बीमार, अस्पताल बदहाल

Fatehpur Updated Tue, 25 Sep 2012 12:00 PM IST
फतेहपुर। समूचा जिला इस समय संक्रामक रोगों की चपेट में है। शहर से देहात तक लोग बुखार और उल्टी-दस्त की बीमारी से परेशान हैं। ग्रामीण इलाकों में तो हाल यह है कि कई गांवों में घर-घर संक्रामक रोगियों की चारपाई बिछी है। कुछ घरों में तो परिवार का हर सदस्य बीमार है। इसके बाद भी स्वास्थ्य महकमा चेत नहीं रहा है। सदर अस्पताल से लेकर प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक में डॉक्टरों का टोटा है। कुछ स्वास्थ्य केंद्रों में तो दवाएं तक न होने की शिकायतें मिल रही हैं। ग्रामीण क्षेत्र के अस्पतालों में डॉक्टरों के न बैठने के कारण रोगियों को जिला अस्पताल की शरण लेनी पड़ रही है। यही कारण है कि जिला अस्पताल में चौबीस घंटे में तीन से चार दर्जन उल्टी-दस्त के रोगी जिले के कोने-कोने से आकर भर्ती हो रहेे हैं। जिला अस्पताल की स्थिति यह है कि रोजाना 1100 से 1200 रोगियों का पंजीयन हो रहा है। जिला अस्पताल की हालत यह है कि ओपीडी, पंजीयन और दवा वितरण खिड़की पर रोगियों की भीड़ देखते ही बन रही है। अस्पताल के तीनों वार्ड इस समय रोगियों से फुल हैं। इतनी अव्यवस्थाओं के बाद भी विभाग के बड़े अफसरों का दावा है कि व्यवस्था दुरुस्त है। अस्पतालों में इलाज की पर्याप्त व्यवस्था है।
जिले भर में कुल छह सामुदायिक, 11 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में 16 अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 18 नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की व्यवस्था है। इनमें कुसुंभी, भदबा, जजमोइया, भैसौली, बारा, संवत, कोट, किशनपुर, गढ़ा, जहांगीर नगर गहुरे, इटैली, मशायक, कटोघन, मोहम्मदपुर गौंती, डीघ, छिछनी, सातों, लतीफपुर, खटौली, बड़ा गांव, सरकंडी, टिकरी, मुत्तौर ऐसे अस्पताल हैं, जहां के संचालन का दायित्व पूरी तरह से चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों पर निर्भर है। खास बात तो यह है कि अस्पतालों में डॉक्टरों के न आने की जानकारी विभागीय उच्चाधिकारियों को भी है। लेकिन इन अस्पतालों का निरीक्षण नहीं किया जाता है।
डॉक्टर आए नहीं, मरीज बैरंग लौटे
खागा(फतेहपुर)। सुबह 11 बजे तक विजईपुर ब्लाक क्षेत्र के उप प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र किशनपुर में डॉक्टर मौजूद नहीं थे। यहां पर मौजूद कर्मचारी ने बताया कि डॉक्टर साहब के आने का कोई दिन निधारित नहीं है। अस्पताल में पिपरहा गांव के मोतीलाल, मंडोली गांव के बाबूलाल, किशनपुर के रामकृपाल उपचार कराने के लिए डाक्टर का इंतजार करते रहे, इसके बाद बैरंग लौट गए।
चतुर्थ श्रेणी कर्मी खोलता है अस्पताल
बिंदकी(फतेहपुर)। एडीशनल पीएचसी जजमोइया में तैनात डॉक्टर व फार्मासिस्ट कई दिन से अस्पताल नहीं आए हैं। यहां पर अस्पताल खोलने का काम चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी कर रहा है। बहुआ प्रतिनिधि के अनुसार ललौली में महीनों से डाक्टर नहीं आए। प्रतिदिन सुबह वार्ड ब्वाय पहुंचकर साफ सफाई करता है, कुछ देर तक बैठा रहता है, इसके बाद चला जाता है।
मलेरिया से दम तोड़ा
असोथर(फतेहपुर)। असोथर में संक्रामक रोगों का कहर थम नहीं रहा है। यहां के विधातीपुर मजरा मेें रविवार की रात विंदा प्रसाद के पुत्र रमेंद्र की मलेरिया की चपेट में आकर मौत हो गई। कई रोज से मलेरिया से पीड़ित बेटे का परिजन फतेहपुर के एक नर्सिंग होम में इलाज करा रहे थे, रविवार की रात अचानक उसकी हालत बिगड़ी और उसने दम तोड़ दिया।
वर्जन:----
विभागीय मीटिंगों के अलावा बाकी सभी दिन सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर पूरे समय बैठते हैं। समय-समय पर निरीक्षण भी किया जाता है। गैर हाजिर मिलने पर उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाती है।
-डॉ. केएल वर्मा, सीएमओ

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