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नेत्र चिकित्सक नहीं हैं, कैसे हो इलाज

Fatehpur Updated Wed, 15 Aug 2012 12:00 PM IST
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फतेहपुर। आंख संबंधी रोग के इलाज के लिए सरकारी अस्पताल भूलकर न जाएं। वजह यह है कि जिला अस्पताल समेत ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर सभी आठ सामुदायिक केंद्रों में नेत्र चिकित्सकों के पद खाली पड़े हैं। इसके चलते नेत्र रोगियों को प्राइवेट अस्पतालों की शरण में जाना पड़ रहा है, वहीं, सरकारी अस्पतालों में नेत्र चिकित्सकों की कमी से राष्ट्रीय अंधता निवारण कार्यक्रम भी प्रभावित होना तय माना जा रहा है।
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जिले के जहानाबाद, बिंदकी, खागा, हुसेनगंज और हथगाम एवं खखरेडृू सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में नेत्र चिकित्सकों के पद सृजित हैं। साल भर पहले तक खखरेडू को छोड़कर सभी सीएचसी में नेत्र रोगियों के ओपीडी की व्यवस्था थी। इतना ही नहीं इन सभी अस्पतालों में अंधता निवारण कार्यक्रम के तहत शिविर लगाकर मुफ्त आपरेशन और उपचार की व्यवस्था होती रही है। शासन की नई स्वास्थ्य नीति के तहत एक-एक करके इन समस्त ग्रामीण अस्पतालों से नेत्र चिकित्सालयों के तबादले कर दिए गए। इससे इन अस्पतालाें में नेत्र रोगियाें को मिलने वाली चिकित्सीय सुविधा ठप है। यही नहीं जिला अस्पताल में तैनात नेत्र चिकित्सक का भी तबादला कर दिया गया है। इससे इस अस्पताल में भी नेत्र रोगों का उपचार बंद हो चुका है। जिले के एकमात्र नेत्र चिकित्सालय मदन मोहन मालवीय अस्पताल में दो डाक्टराें के पद सृजित रहे हैं लेकिन दो महीने पूर्व एक डाक्टर का तबादला हमीरपुर के लिए कर दिया गया है। इससे इस अस्पताल में अब एक मात्र डाक्टर की नियुक्ति है।

खास बात तो यह है कि करीब 29 लाख की आबादी वाले इस जिले में प्रतिवर्ष अंधता निवारण कार्यक्रम के तहत नौ हजार आंखों के आपरेशन का लक्ष्य निर्धारित होता है। एक मात्र कार्यरत डाक्टर रोगियो की ओपीडी संभालेगा या फिर अंधता निवारण कार्यक्रम के तहत लगने वाले शिविरों में आपरेशन कर विभागीय लक्ष्य पूरा करेगा। इस पर सवालिया निशान लग रहे हैं। उधर, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. केएल वर्मा कहते हैं कि जनपद में चिकित्सकों की कमी है। इस समस्या से शासन को अवगत कराते हुए डाक्टरों की मांग की गई है।

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