खेतों मे धान की बेड़ पर चलने लगीं हंसिया

Fatehpur Updated Mon, 13 Aug 2012 12:00 PM IST
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फतेहपुर। नागपंचमी बीत चुकी है और रक्षा बंधन भी निकल गया लेकिन किसान अभी भी धान की खेती को लेकर हलकान हैं। खेतों में पर्याप्त पानी नहीं है, जिससे रोपाई नहीं हो पा रही है। जिले में इस साल एक लाख पचहत्तर हजार हेक्टेयर में धान की बुआई होनी है। अब तक महज साठ फीसदी के आसपास ही रोपाई हो पाई है। किसान ने दो महीने में जो बेड़ तैयार की, वह लगाने काबिल नहीं रही। लिहाजा किसान बेड़ को मवेशी के सामने डालने को विवश है। अमर उजाला टीम ने ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा कर कुछ ब्लाक के गांवों की हकीकत जानी। यकीनन गांवों में रहने वाले किसान गहरी मायूसी के शिकार हैं। उस पर न तो ऊपर वाला मेहरबान हो रहा है और न नीचे वाला।
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हकीकत एक
धाता ब्लाक के राईपुर, आलमपुर गेरिया, रघुनापुर, तेंदुआ, डेडासाई, सईमापुर, भीमपुर, बैरईपुर, जहागीरनगर गौरा, गुरसंडी समेत दर्जनों गांवों का किसान बोई गई बेड़ खेत से लाकर मवेशी को खिलाता दिखाई दे रहा है। किसान राजबहादुर सिंह, अशोक मिश्र, पप्पू उर्फ शैलेंद्र, जानकी प्रसाद, अवधेश यादव, शिव शंकर आदि कहते हैं बिजली आ नहीं रही है, बादल बरस नहीं रहे हैं, नहरें साथ नहीं दे रही हैं। ऐसी दशा में बेड़ खेत से बाहर करने के अलावा दूसरा कोई चारा भी तो नहीं।
हकीकत दो
हंसवा ब्लाक के खेसहन, कुसुंभी, टीसी, एकारी, फैजुल्लापुर, हसवां, कमालीपुर, अतरहा, शहजादेपुर, बक्सापुर मोहनपुर आदि गांव में अभी पचास फीसदी से ज्यादा धान की रोपाई नहीं हो सकी है। गांव के चक्रपाणि, शिवबीर सिंह, अनिल सिंह, सुमित कुमार, रामराज, जगत पाल आदि कहते है चौबीस घंटे में महज तीन से चार घंटे आपूर्ति मिल रही है। इससे बिजली का उपयोग केवल सबमर्सिबल वाले ही कर पा रहे है। जिन किसानों ने धान की रोपाई करवा ली है उन्हें उसके एवज में जेब ढीली करनी पड़ी।
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