एक करोड़ की बिजली, फिर भी खेत प्यासे

Fatehpur Updated Mon, 13 Aug 2012 12:00 PM IST
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फतेहपुर। जरौली पंप कैनाल से सिंचाई व्यवस्था लड़खड़ा रही है। जिम्मेदार अधिकारी एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। जरौली पंप कैनाल के संचालन के लिए प्रति वर्ष एक करोड़ रुपए की बिजली शासन उपलब्ध करा रहा है, लेकिन विभाग अपनी खामियां दूर करने के बजाय बिजली व्यवस्था की गड़बड़ी बताकर अपना पल्ला झाड़ रहा है।
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असोथर विकास खंड में जरौली गांव के आगे यमुना नदी में लगे जरौली पंप कैनाल से पानी निकालकर माइनरों में छोड़ा जाता है। नियमित मरम्मत और देखरेख के अभाव में पंप कैनाल के ज्यादातर पाइपों में छेद हो चुके हैं। पाइपों में खराबी से पंप से जो पानी निकाला जाता है, उसमें से आधा पानी यमुना नदी में ही चला जाता है। यही दशा किशनपुर में यमुना में लगे पंप कैनाल की है। यहां भी ज्यादातर पाइप फटे होने के कारण पानी माइनरों तक नहीं पहुंच पाता। लंबे अरसे से चल रहे पाइप नियमित मरम्मत और देखरेख के अभाव में जर्जर हो रहे हैं। अधिशाषी अभियंता जरौली पंप कैनाल लालमन कहते हैं बिजली विभाग की तकनीकी खामियों के कारण पंप निर्बाध और नियमित रूप से संचालित नहीं हो पाते हैं। उधर विभागीय सूत्रों के मुताबिक सभी माइनरों तक पानी पहुंचाने के लिए विभाग को साल में एक करोड़ की बिजली शासन से मुहैया कराई जा रही है। इसका विभाग सदुपयोग नहीं कर पा रहा है। जिलाधिकारी के आदेश पर एक नहीं दो-दो जांच टीम माइनरों में पानी न पहुंचने के पीछे जरौली पंप कैनाल की खामियां गिना चुकी हैं, लेकिन अभी तक विभाग ने जर्जर पाइपों और मोटर की मरम्मत नहीं करवाई है।
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