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अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने वाले बैक फुट पर

Fatehpur Updated Mon, 16 Jul 2012 12:00 PM IST
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फतेहपुर। जिला पंचायत अध्यक्ष के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव के मामले में नया मोड़ आ गया। रविवार को अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने वाले सात सदस्यों ने किए गए हस्ताक्षर को अपनी भूल करार दिया और विकास के नाम पर जिला पंचायत अध्यक्ष का साथ देने का दावा किया। अध्यक्ष के समर्थन में आए इन सदस्यों ने कहा कि जनपद के विकास के लिए राजकुमार मौर्य को इस समय कुर्सी पर बने रहना आवश्यक हो गया है। इन सदस्यों के पाला बदलने से जिला पंचायत अध्यक्ष के ऊपर से अविश्वास का संकट टलता नजर आ रहा है।
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सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष एवं रमवां-पंथुवा वार्ड से जिला पंचायत सदस्य के पति वीरेंद्र यादव एवं जिला पंचायत अध्यक्ष राजकुमार मौर्य की मौजूदगी में रविवार शाम डाक बंगले में आयोजित प्रेसवार्ता में जहानाबाद वार्ड से जिला पंचायत सदस्य राबिया खानम, डाडा अमौली से अखिलेंद्र प्रताप सिंह, गाजीपुर वार्ड से बुद्धराज धाकड़ी, मोहनखेड़ा वार्ड से सतीशराज सिंह, मुसाफा वार्ड से मनोज कुमार, सुल्तानपुर घोष से रानी तथा जिला पंचायत सदस्य मंजू देवी पासवान ने जिला पंचायत अध्यक्ष को समर्थन दिया। इन सदस्यों ने बताया कि पहली बार लाए गए अविश्वास प्रस्ताव में उन लोगों ने बहकावे में आकर हस्ताक्षर किए थे। दोबारा अविश्वास के लिए जिला मजिस्ट्रेट को दी गई नोटिस में उनके हस्ताक्षर फर्जी हैं। इन सदस्यों ने हस्ताक्षरों का मिलान कराने की मांग की। यह भी कहा कि पार्टी की राजनीति अलग बात है और जिला पंचायत का मुद्दा अलग। अंतरआत्मा का हवाला देते हुए इन सदस्यों ने कहा कि जिले के विकास के लिए राजकुमार मौर्या का अध्यक्ष की कुर्सी पर बने रहना आवश्यक है। इसलिए बिना किसी हानिलाभ के चिंता किए बगैर वह लोग अध्यक्ष के साथ बने रहेगें। चेयरमैन राजकुमार मौर्य ने तीस सदस्यों के समर्थन का दावा करते हुए कहा कि उनके विरुद्ध साजिशन अविश्वास प्रस्ताव लाया गया जो सदन में पास नहीं होगा। जिला पंचायत अध्यक्ष ने कहा बेहतर होता कि सब लोग मिलकर जनपद के विकास के लिए काम करते। सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष वीरेन्द्र यादव ने भी अविश्वास प्रस्ताव पास न हो पाने का दावा किया। बतादें कि चेयरमैन के विरुद्ध लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर 19 जुलाई को प्रशासन ने बोर्ड की बैठक बुलाई है। बोर्ड में कुल 41 सदस्य है। यदि आधे से अधिक सदस्य अविश्वास के पक्ष में नहीं जुटते तो सदन में अविश्वास प्रस्ताव गिर जाएगा।

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