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धान की तरक्की में पानी की कमी रोड़ा

Fatehpur Updated Mon, 16 Jul 2012 12:00 PM IST
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फतेहपुर। मानसून की बेरुखी ने खरीफ के लिए चुनौतियां खड़ी कर दी है। अभी औसत से भी कम बारिश हुई है। इस बारिश से अन्य फसलों की बुआई का काम तो चल निकला है लेकिन धान की रोपाई ठीक से नहीं शुरू हो पायी है। धान की रोपाई प्रभावित होने से किसान परेशान हैं वहीं उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने के आसार बन रहे हैं।
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जुलाई में औसत 280 मिली लीटर बारिश की जरूरत होती है। जिसके सापेक्ष विभागीय जानकारी के मुताबिक 86 मिलीलीटर वर्षा रिकार्ड की गई। दो दिनों में हुई बरसात के बाद यह आंकड़ा 100 मिली लीटर पहुंच गया है। बावजूद इसके यह पानी धान की रोपाई के लिए पर्याप्त नही हैं। हालांकि दो दिनों में हुई बरसात के पश्चात खरीफ की अन्य फसलों मसलन, ज्वार, बाजरा, तिल, उर्द, मूंग, अरहर आदि की बुआई किसानों ने शुरू कर दी है लेकिन धान की रोपाई में तेजी नहीं आ रही है। जिससे किसानों की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। जिनके पास सिंचाई के वैकल्पिक संसाधन हैं वहां धान लगाने का काम शुरू हुआ है, किंतु इससे भरपाई होती नहीं दिख रही है।

खरीफ में मुख्य फसल धान लगभग सत्तर हजार हेक्टेयर में पैदा किया जाता है। विभाग से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक अभी तक लक्ष्य के सापेक्ष करीब पंद्रह हजार हेक्टेयर धान आच्छादित हुआ है। जबकि पिछले सत्र में जुलाई मध्य तक कुल निर्धारित लक्ष्य का साठ फीसदी आच्छादन हो चुका था क्योंकि पिछले सत्र में मध्य जुलाई तक 280 के सापेक्ष 312 मिली लीटर बारिश हो चुकी थी। आच्छादन पिछड़ने की वजह से उत्पादन पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। जिससे लगभग सभी धान पट्टियां प्रभावित हैं। बता दें कि हसवा, मलवां, भिटौरा असोथर, बहुआ सहित लगभग सभी ब्लाकों में धान पैदा किया जाता है।

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