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49 बदनसीबों को चार कंधे भी नहीं मिले

Fatehpur Updated Sat, 14 Jul 2012 12:00 PM IST
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फतेहपुर। इस साल जनवरी से अब तक जिले में अलग-अलग जगह 60 अज्ञात शव बरामद हुए हैं। पुलिस इनमें से 11 शवों की ही शिनाख्त करा सकी है। बाकी 49 शवों का लावारिस में अंतिम संस्कार करा दिया गया। यह 49 वे बदनसीब हैं, जिन्हें मौत के बाद श्मशान घाट तक ले जाने के लिए अपनों के चार कंधे भी नसीब नहीं हुए।
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ललौली थाना क्षेत्र के बिझौली गांव में 10 जुलाई को एक सूखे कुएं से दो युवकों के शव मिले। सूचना मिलने पर पुलिस ने पहुंचकर दोनों शवों को कुएं से बाहर निकलवाया, लेकिन दोनों शव सड़ चुके थे, इसलिए उनकी पहचान नहीं हो सकी। बाद में पुलिस ने अज्ञात में पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस अभी तक यह खुलासा नहीं कर सकी है कि दोनों शव किसके थे और कुएं में कैसे पहुंचे। उधर, 26 जून को थरियांव थाना क्षेत्र के एक खेत से वृद्धा का शव मिला। इसी दिन ललौली थाना क्षेत्र के करैया डेरा मजरा कोर्राकनक गांव 40 वर्षीय महिला का शव मिला। इन दोनों का भी शिनाख्त नहीं हो सका। ये तीन शवों का मामला बानगी भर है। इस साल जनवरी से अब तक जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में पुलिस ने एक-एक कर 60 अज्ञात शव बरामद किए, लेकिन सिर्फ 11 का ही शिनाख्त करा सकी है।


पुलिस ऐसे कराती है अंतिम संस्कार
पोस्टमार्टम हाउस पहुंचने वाले सिपाही पोस्टमार्टम के बाद मुर्दा ढोने वाले को एक क्वार्टर देशी शराब व दो-तीन सौ रुपए थमाकर निकल जाते हैं। वह ऐसे शवों को अपने रिक्शे में लादकर कभी गंगा में तो कभी नशा अधिक होने पर रास्ते में ही कहीं फेंक आता है। रास्ते में शव नजर आने पर सिपाही उसे दोबारा पकड़कर शवों को फिंकवाते हैं। एक सिपाही ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अज्ञात शव का पोस्टमार्टम कराने के लिए जिस पुलिस कर्मी की ड्यूटी लग जाती है, उसकी जेब से चार-पांच सौ रुपए खर्च होना स्वाभाविक है। घटनास्थल से लाश पोस्टमार्टम पहुंचाने के लिए तो किसी वाहन को बेगार में पकड़ लिया जाता है, लेकिन लाश का अंतिम संस्कार कराने के लिए एक क्वार्टर शराब और इसके बाद तीन से चार सौ रुपए नगद देना पड़ता है।

वर्जन:----
अज्ञात शवों की शिनाख्त कराने की हर संभव कोशिश की जाती है। लाश सील करने से पहले फोटो खिंचवा कर थाने के रिकार्ड में रखा जाता है। शव से बरामद कपड़े और सामान सील करके सुरक्षित रखा जाता है। इतना ही नहीं शव का फिंगर प्रिंट लेकर सुरक्षित किए जाते हैं। जरूरत पड़ने समाचार पत्रों में इश्तहार भी कराया जाता है। -आरके चतुर्वेदी, पुलिस अधीक्षक
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