धान की खेती करने के मूड में नहीं हैं किसान

Fatehpur Updated Tue, 19 Jun 2012 12:00 PM IST
फतेहपुर। भूगर्भ जलस्तर तेजी से घटने से जिले के चार ब्लाक अमौली, हथगाम, हसवा व मलवां में शासन से किसी भी तरह की नलकूप की बोरिंग पर रोक लगाने से किसानों के सामने सिंचाई की समस्या गहराने लगी है। सबसे ज्यादा समस्या धान की पैदावार करने वाले किसानों को है। जिले में बाकी जगह धान की फसल की तैयारी हो रही है, वहीं बोरिंग पर रोक वाले चारों ब्लाकों में धान की पैदावार करने वाले किसान अभी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। कुछ किसान तो अबकी धान की फसल से किनारा करने के मूड में दिख रहे हैं। इन किसानों का कहना है कि सिंचाई की समुचित व्यवस्था न होने से धान की फसल में नुकसान होने का संभावना ज्यादा दिख रही है।
भूगर्भ जलस्तर तेजी से घटने की वजह से शासन ने जिले के अमौली, हथगाम, हसवा और मलवां ब्लाकों में किसी भी प्रकार की नलकूप बोरिंग पर रोक लगा रखी है। साथ ही यह भी निर्देश दिए गए है कि जो नलकूप संचालित हैं, उनसे पानी का दोहन कम से कम किया जाए। ऐसी स्थिति में किसानों के सामने सिंचाई को लेकर समस्या खड़ी हो गई है, जिसका असर खरीफ सत्र में धान की खेती पर पड़ता दिखाई दे रहा है। दुविधा में फंसे किसान यह नहीं तय कर पा रहे हैं कि धान की फसल उगाएं या नहीं।
गौरतलब है कि पर्याप्त बरसात न होने से यहां के किसान सिंचाई के लिए नलकूपों पर ही निर्भर हैं। ऐसे में जिस प्रकार नलकूप के संचालन एवं नए नलकूप लगाने पर प्रतिबंध लगा है उससे मुश्किलें बढ़ना तय है। इस समय नर्सरी डालने का काम अन्य ब्लाकों में तेजी से चल रहा है वहीं दूसरी ओर प्रतिबंधित किए गए ब्लाकों में धान की तैयारियां सुस्त है। हसवा क्षेत्र के किसान अजमेर सिंह, रामकुमार, पूरन आदि का कहना है कि धान की फसल बगैर पानी के संभव नहीं है। सिंचाई के अभाव में फसल सूख जाए तो किसान कहीं का नहीं रहेगा। ऐसे में इस बार धान की फसल उगाना जोखिम भरा है। मलवां क्षेत्र के किसान सूरजदीन, विंदा प्रसाद व राम कुमार का भी कमोवेश यही कहना है कि जिस तरह की स्थितियां हैं उसमें खेती का कार्य बेहद ही जटिल एवं जोखिम भरा हो गया है। मालूम हो कि जिले में धान की खेती व्यापक स्तर पर की जाती है, जिसमें हसवा एवं मलवां प्रमुख धान पट्टियों में है। यहां जनपद में कुल उत्पादित धान का करीब बारह फीसदी धान पैदा किया जाता है। नलकूपों की बोरिंग पर प्रतिबंध के बारे में सहायक अभियंता लघु़ सिंचाई एके सिन्हा का कहना है कि शासन से जो निर्देश मिले हैं, उन्हीं का अनुपालन कराया जा रहा है।

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