पुलिस की नाजायज सख्ती बनी ब्रेन हैमरेज का सबब!

Fatehpur Updated Thu, 14 Jun 2012 12:00 PM IST
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फतेहपुर। पिछले महीने की 29 तारीख को खागा कोतवाली में ऐसा क्या घटा था, जो टप्पेबाजी के मामले में फरियादी शिवसहाय की मौत का सबब बना? यह सवाल उनके गांव वालों, परिजनों को आज भी विचलित किए हुए है। परिजनों से पूछें तो वे तल्खी से कहते हैं, पुलिस की अपमानजनक ज्यादती ने उन्हें मौत के मुंह में धकेल दिया। वे बताते हैं कि खागा कोतवाली पुलिस की नाजायज सख्ती ही ब्रेन हैमरेज का सबब बनी।
ग्राम अजनई निवासी मृतक के भाई एवं पूर्व प्रधान सूरजदीन मौर्या बताते हैं कि 29 मई को टप्पेबाजी की वारदात के बाद खागा कोतवाली में शिवसहाय (55) के कैद होने की सूचना मिलने पर वह अपने भतीजे सोमप्रकाश के साथ पहुंचे थे। उन्हें शिवसहाय ने बताया था कि टप्पेबाजों के पास से उनके 55 हजार रुपए बरामद हो गए थे, जिसे उन्होंने अपने भतीजे से घर भिजवा दिया, लेकिन दबोच लिए गए तीनो टप्पेबाजों ने पुलिस से साठ-गांठ कर उल्टे उन पर आरोप लगा दिया कि उनके तीस हजार रुपए छीन लिए गए हैं। अब पुलिस कह रही है कि 85 हजार रुपए जमा करो, तब कोतवाली से जाने दिया जाएगा।
सूरजदीन ने बताया कि शिवसहाय से यह जानकारी मिलने पर सोमप्रकाश ने पुलिस से ऐतराज जताया तो उसके साथ कोतवाली प्रभारी गोपालकृष्ण गुप्ता ने गाली-गलौज किया। तीनो (शिवसहाय, सूरजदीन, सोमप्रकाश) को 85 हजार रुपए जमा होने तक एक कमरे में कैद करा दिया। मोबाइल फोन भी रखवा लिए, ताकि पीड़ितों की आवाज कोतवाली से बाहर न जा सके। किसी तरह इस पूरे घटनाक्रम का पता चलने पर जब ग्राम सचिवालय के समीक्षा अधिकारी रामराज, जिला पंचायत अध्यक्ष राजकुमार मौर्य आदि ने कोतवाली में फोन किया, तब कहीं उन्हें छोड़ा गया।
सूरजदीन ने बताया कि इस घटनाक्रम से शिवसहाय को गहरा सदमा लगा। वह रट लगाए रहे कि उनके साथ जीवन में ऐसा पहली बार हुआ है। घर पहुंचते ही वह मानसिक आघात बर्दाश्त न कर सके। रात नौ बजे ब्रेन हैमरेज हुआ। अचानक वह चारपाई पर गिर पड़े। उन्हें इलाज के लिए पहले खागा और वहां से लखनऊ ले जाया गया। लखनऊ में 31 मई को वह दम तोड़ बैठे। घटना से ऐसा जनाक्रोश भड़का कि पुलिस कप्तान को दो पुलिस कर्मी लाइन हाजिर करने पड़े।
उल्लेखनीय है कि 29 मई को शिवसहाय के साथ 55 हजार रुपए की टप्पेबाजी हुई थी। रुपए समेत तीन टप्पेबाज दबोच कर खागा कोतवाली ले जाए गए। कोतवाली प्रभारी के सामने टप्पेबाजों ने उल्टे शिवसहाय पर आरोप जड़ दिया कि उन्होंने तीस हजार रुपए छीन लिए हैं। बस यही से पुलिस की भूमिका संदिग्ध हो चली। हाल ही में इसी तरह वाकया गाजीपुर थाने में हुआ। एक युवक को उल्टा कर पुलिस ने ऐसी पिटाई लगाई कि उसे बेहोशी की हालत में जिला अस्पताल में दाखिल कराना पड़ा।
खागा कोतवाली प्रभारी गोपालकृष्ण गुप्ता कहते हैं कि टप्पेबाजों को पिटाई कर लाया गया था। सिर्फ बरामद 55 हजार रुपए जमा करने को कहा गया था। रुपए दो दिन बाद अदालत से मिल जाते लेकिन वह रुपए जमा करने को तैयार नहीं थे। उनके साथ कोई अभद्रता नहीं की गई।
पूर्व विधायक सफीर ने एसपी आरके चतुर्वेदी से सिपाहियों पर अभद्रता का आरोप लगाया था। एसपी ने दोनों सिपाहियों राजेश सिंह और सतेंद्र को लाइन हाजिर कर दिया था। इस मामले में किसी तरह की जांच नहीं करवाई गई। दोनों सिपाही अभी भी लाइन में हैं।
पुलिस अधीक्षक आरके चतुर्वेदी कहते हैं कि किसी का कोई दोष नहीं था। टप्पेबाज पकड़े गए और रुपया बरामद हुआ तो उसे लिखापढ़ी में दिखाते हुए रुपया जमा करवाया गया। शिवसहाय रुपया जमा नहीं करना चाहते थे। वह रुपया वादी के परिवार को वापस भी हो गया। न सिपाहियों का दोष है और न मृतक का। मृतक को इसलिए मानसिक आघात लगा होगा कि मेहनत का पैसा थाने में जमा हो गया, शायद वापस न मिले। सिपाहियों ने अपनी ड्यूटी निभाई लेकिन परिजनों को उक्त सिपाहियों के प्रति असंतोष था इसलिए दोनों सिपाहियों को थाने से हटाकर लाइन में पोस्टिंग कर दी गई।

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