धान के बीज का संकट

Fatehpur Updated Mon, 11 Jun 2012 12:00 PM IST
फतेहपुर। खरीफ की तैयारियों में जुटे किसानों के लिए बीज किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। कृषि विभाग के वितरण केंद्रों में बीज की उपलब्धता न होने से किसान इधर-उधर भटक रहे हैं। सबसे ज्यादा समस्या धान के बीज को लेकर आ रही है। बाजार में मौजूद खुले बीज की अपेक्षा कृषि विभाग के बीज केंद्र से मिलने वाला बीज प्रमाणित होने के चलते किसानों के बीच विश्वसनीय रहता है।
धान की नर्सरी डालने के लिए यह पीक सीजन चल रहा है, लेकिन बीज की किल्लत की वजह से नर्सरी का काम पिछड़ रहा है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से नर्सरी डालने का सबसे अच्छा समय एक से पंद्रह जून तक माना जाता है। विभागीय बीज भंडार ग्रहों में बीज की समुचित उपलब्धता न होने से किसानों को खुले बाजार की ओर रुख करना पड़ रहा है। जहां बीज का मूल्य निर्धारण और गुणवत्ता की प्रमाणिकता दोनो संदेह के घेरे में है। जानकारी के मुताबिक विभाग में अभी तक चार सौ क्विंटल धान का बीज ही आया है जिसका वितरण विभिन्न योजनाओं के तहत किसानों को किया जा चुका है। ऐसे में अब जो किसान आ रहे हैं उन्हें खाली हाथ ही लौटना पड़ रहा है।
हरिहरगंज स्थित केंद्र पर धान का बीज लेने के लिए आए रमवा-पंथुआ के किसान शिवकुमार, प्रेमनंदन, चौथकियापुर के मनोहर आदि ने बताया कि पिछले कई दिनों से चक्कर लगा रहे हैं लेकिन धान का बीज उपलब्ध नहीं हो पाया है। बीज को लेकर इसी प्रकार की समस्या अन्य विभागीय सेंटरों पर है।
उधर, उप निदेशक कृषि प्रसार टीपी चौधरी ने बताया कि विभागीय बिक्री केंद्रों पर धान के बीज की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कराई जा रही है। जितना बीज उपलब्ध हुआ है उसका वितरण नियमानुसार कराया जा रहा है। बता दें कि विभाग द्वारा नरेंद्र पंत मंसूरी जैसी उन्नतशील प्रजातियों के अलावा शंकर प्रजाति के बीज भी वितरित किए जा रहे हैं। जिनमें सात सौ रुपये प्रति क्विंटल तक का अनुदान किसानों को दिया जा रहा है। अनुदान की राशि नकद न देकर उसका समायोजन धान के मूल्य पर किए जाने की व्यवस्था है। धान के अलावा तिल, उर्द, मूंग, मूंगफली आदि जिंसों के बीज भी किसानों को उपलब्धत कराने के निर्देश है। खरीफ में सर्वाधिक आच्छादन धान का किया जाना है जिसका क्षेत्रफल पौने दो लाख हेक्टेयर निर्धारित किया गया।

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