इस साल 3421 नए क्षय रोगी चिंह्ति

Fatehpur Updated Wed, 16 May 2012 12:00 PM IST
फतेहपुर। टीबी (क्षय रोग) रोग की चपेट में आकर मरने वालों की संख्या बढ़ी है। एक साल में आंकड़ा ढाई फीसदी से तीन फीसदी मृत्युदर तक पहुंच गया है। इस वर्ष स्वास्थ्य विभाग ने 3421 नए क्षय रोगी चिंह्ति किए हैं। इन रोगियों में धनात्मक रोगियों की संख्या डेढ़ हजार से अधिक है। एक धनात्मक रोगी साल भर में 15 से 20 नए क्षय रोगी पैदा करता है। टीबी रोगियों की संख्या बढ़ने के चलते जिले में मल्टी ड्रग रजिस्टेंस खोलने की कवायद शासन स्तर से शुरू कर दी गई है। जिला क्षय रोग नियंत्रण विभाग के अनुसार इससे गंभीर रोगियों के इलाज में सहूलियत मिलेगी।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से क्षयरोग पर काबू पाने के लिए जिले में 1048 डाट सेंटर हैं। इन सेंटरों में रोगियों को दवा खिलाने की व्यवस्था है। इसके अलावा जिले के 23 सरकारी अस्पतालों में बलगम जांच की व्यवस्था है। जल्द ही दो बलगम जांच सेंटर और खुलने वाले हैं। इसके बावजूद क्षय रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है। वर्ष 2011-12 में जिले भर में 3421 टीबी रोगी चिंह्ति किए गए। इनमें 2540 धनात्मक पाए गए हैं। धनात्मक रोगी गंभीर की श्रेणी में आते हैं। ऐसे प्रति रोगी सालभर में 15 से 20 नए रोगियों को जन्म देते हैं। इसका प्रमाण स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े स्पष्ट कर रहे हैं। पिछले सत्र में 1816 नए धनात्मक रोगी पाए गए हैं, जबकि 724 ऐसे रोगी मिले हैं, जिन्होंने बीच में दवा खाना बंद कर दिया था। इस तरह कुल धनात्मक रोगियों की संख्या 2540 है। विभाग के आंकड़े बताते हैं कि क्षय रोगियों का जिले में मौत का औसत तीन फीसदी है।
उधर, विशेषज्ञों का मानना है कि क्षय रोग असाध्य नहीं है, लेकिन उसका निर्धारित अवधि तक नियमित उपचार किया जाए। जो रोगी दवा खाना शुरू तो करते हैं, लेकिन कोर्स पूरा किए बिना बार-बार दवा खाना बंद कर देते हैं, ऐसे रोगियों पर डाट सेंटरों में मिलने वाली दवा कारगर साबित नहीं होती है और ऐसे रोगियों को अगर एमडीआर लखनऊ या फिर आगरा नहीं भेजा गया, तो उनकी मौत हो सकती है। जिले में बढ़ते ऐसे रोगियों की संख्या को देखते हुए विभाग जिले में एमडीआर स्थापित करने जा रहा है। संभव है कि अगले साल तक टीबी रोगियों के उपचार की यह व्यवस्था जिले में लागू हो जाएगी।
जिला क्षयरोग चिकित्सक डॉ. एसके सिंह का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग क्षयरोग के रोकथाम का पूरा प्रयास कर रहा है, लेकिन रोगियों की लापरवाही और असावधानी के कारण रोगियों की संख्या में वृद्धि हो रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दो सप्ताह से अधिक समय तक अगर खांसी आती है, तो क्षयरोग हो सकता है। ऐसी हालत में तत्काल बलगम की जांच कराएं और रोग चिंह्ति होने पर नियमित दवा का इस्तेमाल करें। उन्होंने बताया कि अभी तक गंभीर रोगियों के उपचार के लिए आगरा और लखनऊ स्थित एमडीआर में व्यवस्था है, लेकिन जल्द ही जिले में भी यह व्यवस्था होने वाली है।

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