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फैजल बनाएंगे याददाश्त का अनूठा रिकार्ड

Fatehpur Updated Thu, 03 May 2012 12:00 PM IST
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फतेहपुर। गजब की याददाश्त है मुरादाबाद के जुनूनी नौजवान मोहम्मद फैजल की। वह पहले इंडिया बुक आफ रिकार्ड, फिर गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड में अपना नाम दर्ज कराकर दुनिया भर में अपनी याददाश्त का लोहा मनवा चुके हैं। मोहम्मद फैजल की दिली तमन्ना अब एक मिनट में 280 बाइनरी डिजिट याद कर देश का नाम रोशन करने की है।
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टीवी चैनलों के जरिए सात समंदर पार तक अपनी पहचान बनाने वाले मुरादाबाद के इस युवा ने युवाओं के बौद्धिक विकास के लिए मुहिम शुरू की है। शैक्षिक संस्थानों में कार्यशालाओं के जरिए वह अभिभावकों,शिक्षकों और विद्यार्थियों को एक साथ प्रमोट कर रहे हैं। बुधवार को कार्यक्रम के सिलिसले में शहर आए मोहम्मद फैजल ने अमर उजाला से खास बातचीत में याद्दाश्त के सहारे रिकार्ड की दुनिया में अपनी खास पहचान बनाने के सफर से जुड़े अनुभव और खट्टे मीटे अनुभव बांटे। किसान परिवार से जुड़े मोहम्मद फैज़ल ने बताया गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड में नाम दर्ज कराना उनका मकसद नहीं था लेकिन कुछ वर्ष पहले 220 देशों की राजधानी के नाम, करेंसी तथा एसटीडी कोड याद करके इंडिया बुक आफ रिकार्ड में नाम दर्ज कराने के बाद विचार आया क्यों न गिनीजबुक में नाम दर्ज कराया जाए। बस यहीं से प्रयास शुरू हो गए। नेट के माध्यम से गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी जुटाई। इसके बाद अभ्यास शुरू हुआ। छह वर्ष की लगातार मेहनत के बाद नाम दर्ज कराने में सफलता मिली। फैज़ल ने एक मिनट में व्युतक्रम में रखी वस्तुओं के नाम बताकर यह उपलब्धि हासिल की। एक साधारण छात्र के लिए यह कैसे संभव है। इस सवाल पर मोहम्मद फैज़ल कहते हैं मुश्किल कुछ नहीं है। सकारात्मक सोच, लगातार अभ्यास तथा अभिभावकों का सपोर्ट, किसी छात्र के पास यदि यह तत्व हैं तो उसके लिए कुछ भी मुश्किल नहीं है। कुछ विशेष अभ्यास भी हैं जिनका प्रशिक्षण दिया जाता है। उन्होने बताया देश के लिए नाम कमाना ही जीवन का उद्देश्य है। अगला लक्ष्य एक मिनट में 280 बाइनरी डिजिट याद करके नया रिकार्ड बनाना है। पैरेटिंग सेमिनार(अभिभावक कार्यशाला ) के बारे में उन्होने बताया आईआईटी दिल्ली, पंजाब यूनिवर्सिटी, दिल्ली पब्लिक स्कूल, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी जैसे संस्थानों में सेमिनार के माध्यम से छात्रों के बौद्विक विकास के लिए परामर्श और प्रशिक्षण दिया गया है। विद्यार्थियों के लिए नो गाइडेंस इज बेस्ट गाइडेंस के फार्मूला की वकालत करते हुए कहा आज का विद्यार्थियों बौद्धिक तौर पर मजबूत होने के साथ संवेदनशील भी है। अभिभावकों को चाहिए वह अपने बच्चों को इतनी स्वतंत्रता अवश्य दें कि वह खुद के बारे में सोंच सके। किंतु इसका यह कतई मतलब नहीं है कि अभिभावक अपने दायित्व से मुक्त रहें। उन्हें भावनात्मक तौर से बच्चों के साथ मजबूती से जुड़ा रहना चाहिए। निश्चित तौर पर ऐसा बच्चा सफलता की राह में आगे बढ़ेगा।

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