सरकार की धान खरीद योजना बेमानी

Fatehpur Updated Thu, 27 Nov 2014 05:30 AM IST
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फतेहपुर। सरकार की धान खरीद योजना किसानों के लिए बेमानी है। धान खरीद केंद्र एक अक्टूबर से खोल दिए गए हैं लेकिन अभी तक खरीद के लक्ष्य का एक चौथाई भी धान खरीद नहीं हो सकी है। जनपद में 25 धान खरीद केंद्र बनाए गए हैं। मगर अभी तक राइस मिलों का अनुबंध नहीं हो सका है। ऐसे में केंद्र प्रभारी धान खरीद भी ले तो धान का चावल कैसे निकाला जाएगा। भारतीय खाद्य निगम, मार्केटिंग, नेफेड, पीसीएफ, यूपीएएस, एनसीसीएफ के विभागों ने धान खरीद के केंद्र बनाए हैं। इसमें अधिकतर खरीद केंद्रों में अभी तक धान की बोहनी तक नहीं हुई है। धान खरीद के दो माह गुजरने पर मात्र 321 कुंतल 60 किलो धान की खरीद की गई है, जिसमें भारतीय खाद्य निगम ने 77.60 किलो और मार्केटिंग विभाग ने 244 कुंतल धान की खरीद की है। ऐसे में 35 हजार मीट्रिक टन जिले का धान खरीद का लक्ष्य कैसे पूरा हो सकेगा। अधिकतर केंद्र प्रभारी किसानों को सरकारी मानक की शर्तें रखकर धान खरीदने से इनकार कर रहे हैं।
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वहीं किसान अशोक कुमार ने बताया कि पूरे प्रदेश में सूखा पड़ गया है। ऐसे में धान तैयार करना भी मुश्किल दिखाई दे रहा था। किसी तरह से धान की फसल तैयार की गई है तो धान खरीदने के लिए कोई तैयार नहीं हो रहा है। गांव में व्यापारी धान की तौल कराते है तो नगद रुपये नहीं दे रहे हैं। किसान मुन्ना यादव ने बताया कि सरकार धान खरीद के नाम पर किसानों के साथ बेइमानी कर रही है। किसान के खेत में जो धान पैदा हुआ है वहीं तो किसान बेचेगा। क्रय केंद्रों में धान खरीद शुरू न होने से राइस मिलों में भी धान का सही दाम नहीं मिल रहा है।
‘सूखे की वजह से धान डैमेज हो गया है, जिससे धान टूटता है और चावल का प्रतिशत भी कम है। क्रय केंद्रों में धान बेचने पर सरकार को 67 प्रतिशत चावल देना पड़ता है। वहीं एफसीआई में चावल भी रिजेक्ट कर दिया जाता है। पिछले साल काभी नुकसान उठाना पड़ा, ऐसे में धान मानक के अनुसार होगा तो क्रय केंद्रों को धान लेकर रिसीविंग दी जाएगी।’- जितेंद्र कुमार पांडेय, शीतला राइस मिल, थरियांव
‘धान डैमेज होने से खरीद नहीं हो पा रही है। धान खरीद को लेकर भारत सरकार की ओर से खाद्य व कृषि मंत्रालय और राज्य की ओर से मंडलीय अधिकारियों की टीम आई थी। टीम जिले की धान का सैम्पल ले गई है, जिसकी रिपोर्ट में डैमेज प्रतिशत बढ़ेगा तो धान खरीद में तेजी आएगी।’
- रवि गौतम, जिला खाद्य विपणन अधिकारी
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