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चयन समिति ने नहीं दिखाई हरी झंडी

Fatehpur Updated Wed, 26 Nov 2014 05:30 AM IST
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फतेहपुर। नई ग्राम पंचायतों का दर्जा पाने की लाइन में खड़े 54 राजस्व गांवों के भविष्य पर जिला स्तरीय चयन समिति की मुहर नहीं लग सकी है। 12 नवंबर को हुए अंतिम प्रकाशन में सामने आए इन राजस्व गांवों के लिए आपत्तियां मांगी गईं थीं। इनमें आईं आधा सैकड़ा शिकायतों के निस्तारण के बाद समिति को 25 नवंबर तक अपनी संस्तुति शासन को भेजनी थी। चयन समिति की बैठक न होने से निदेशालय को नई पंचायतों की रिपोर्ट नहीं भेजी जा सकी।
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नई पंचायतों के पुनर्गठन प्रक्रिया में धांधली की शिकायतें आने के बाद शासन के प्रमुख सचिव चंचल कुमार तिवारी ने शासनादेश जारी करके 7 नवंबर से 12 नवंबर तक हर हालत में ब्लाक स्तर पर ग्राम पंचायत पुनर्गठन/ परिसीमन का अनंतिम प्रकाशन कराने को कहा था। सूची प्रकाशन के बाद आपत्तियां दाखिल करने के लिए 22 नवंबर तक का वक्त दिया गया था। आपत्तियां दाखिल होने के बाद जिला स्तर पर गठित चयन समिति को पड़ताल के बाद अपनी संस्तुति 25 नवंबर तक शासन को भेजनी थी, जो नहीं भेजी जा सकी है। उधर, जनता नई पंचायतें बनने की कतार में खड़े राजस्व गांवों के बारे में अंतिम फैसला सुनने का बेसब्री से इंतजार कर रही है।


हम क्यों किए गए लाइन से बाहर
नई ग्राम पंचायत पुनर्गठन के मानक में एक हजार की आबादी वाले राजस्व गांव शामिल हैं। बाढ़ व अन्य दैवीय आपदाओं के चलते गांवों की आबादी घटने और जनगणना 2011 के आंकड़ाें में बदली स्थिति को देखते हुए प्रक्रिया को अंजाम दिया जाना है। जिले से 150 दावे नई पंचायत के लिए हुए थे। असोथर ब्लाक से देवलान ग्राम पंचायत के लिलरा और सैमसी ग्राम पंचायत के उमरपुर राजस्व गांव का नाम 12 नवंबर तक चस्पा हुई सूची में शामिल है। इन राजस्व गांवों के साथ ही घाटमपुर ग्राम पंचायत के देईमऊ, करैहा के चकपैगंबरपुर, सरांय के अंदीपुर व बहादुरपुर के गोकंद राजस्व गांवों की जनता ने भी नई पंचायत के लिए अपना-अपना दावा किया था। इन गांवों की जनता को सूची में जगह नहीं मिलने का मलाल है। एडीओ पंचायत अवधेश प्रसाद इन राजस्व गांवों को मानकविहीन बता रहे हैं, जबकि उक्त गांवों के लोग इस मामले को खेल से जोड़ रहे हैं।

जनप्रतिनिधियों में सबसे ज्यादा बेताबी
जिले में फिलहाल ग्राम पंचायतों की संख्या 786 है। नई पंचायतों की कतार में खड़े हुए 54 गांवों को मिला दें तो यह संख्या 840 हो रही है। इस प्रकार से साफ है कि अगले साल संभावित त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में कम से कम तीन दर्जन नई पंचायतों का वजूद में आना तय है। इन नई पंचायतों के अंतिम मुहर लगवा कर सामने आने के पहले ही गंवई सियासत की तपिश बढ़ने लगी है। ग्राम जनप्रतिनिधि व उनके लोग जिला पंचायत राज कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं।

वर्जन--
दो दिन की छुट्टियों से विभागीय काम प्रभावित होने का असर नई पंचायत पुनर्गठन प्रक्रिया पर पड़ा है। एक दो दिन के अंदर डीएम की अध्यक्षता में बैठक बुलाकर आपत्तियों को खंगालने के बाद शासन को संस्तुति रिपोर्ट भेज दी जाएगी। नई पंचायतें, वही राजस्व गांव बन सकेंगे जो सही मायने मेें इसके हकदार होंगे।
नंदिनी जैन, डीपीआरओ, फतेहपुर
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