नौकर ने रखे चाकर, व्यवस्था औंधे मुंह

Fatehpur Updated Wed, 07 May 2014 05:30 AM IST
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फतेहपुर। राजस्व गांवों की गंदगी दूर करने को तैयार किए गए सफाई कर्मियों में हर वर्ग की मौजूदगी भारी पड़ रही है। इस व्यवस्था मेें लगे सफाई कर्मियाें में ये गैर-पेशेवर सफाई कर्मी बाधक बन रहे हैं। इनमें से कुछ गैर-पेशेवर सफाई कर्मी पगार का थोड़ा हिस्सा पेशेवर सफाई कर्मियों पर खर्च कर नौकरी बजा रहे हैं। हालात यह हैं कि किसी गांव मेें महीने में एक बार झाड़ू लग रही है तो किसी गांव में महीनों बाद नालियां साफ हो रहीं हैं। वह भी चाकरों के जरिए। इतना ही नहीं गांववालों की मानें तो उन्होंने तमाम सफाई कर्मियों की आज तक शक्ल ही नहीं देखी।
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वर्ष 2009 में बसपा सरकार ने नगरों की तरह राजस्व गांवों को साफ-सफाई से आच्छादित करने को जिले के 1502 गांवों मेें सफाई कर्मियों की तैनाती की थी। इस तैनाती में मौजूदा सरकार ने गैर-पेशेवर वर्ग के बेरोजगारों को भी शामिल किया था। आरक्षण को आधार बना कर यकीनन गैर-पेशेवर समाज से जुड़े बेरोजगारों को सरकारी नौकरी भले मिल गई हो लेकिन अभी तक इसका विपरीत असर ही दिखाई दिया है। गैर पेशेवर सफाई कर्मी झाड़ू व फावड़ा उठाने से बचते चले आ रहे हैं। ऐसे में राजस्व गांवों से गंदगी भगाने का सपना पूरा होता नहीं दिख रहा है।
मसलन, जिले के बिंदकी तहसील के देवमई व मलवां ब्लाक के कुछ राजस्व गांवोें की तस्वीर देखे तो हकीकत साफ हो जाती है। रावतपुर में उन्नाव के विमलेश मौर्या, करचलपुर में कानपुर नगर के नरवल के मनोज गुप्ता, गलाथा मेें कानपुर नगर के प्रताप सिंह यादव, गंचौली बुर्जुग मेें अमौली के सुरेश दिवाकर, गोधरौली में फतेहपुर के सूर्यभान पाल, बनियनखेड़ा में आनंदराज पाल, हाजीपुर में कानपुर नगर के दिलीप सिंह राजपूत, बसावनपुर में कानपुर के ही राज नारायण कुशवाहा की तैनाती है। इन गैर पेशेवर समाज से ताल्लुक रखने वाले सफाई कर्मियों की नौकरी पर नियुक्ति के साथ से सवाल खड़े हो रहे हैं।
गोधरौली के ओमप्रकाश कहते हैं कि सूर्यभान पाल कभी कभार ही गांव में नजर आता है। वह भी खुद सफाई करने के बजाए गांव के पेशेवर व्यक्ति को महीने में 100-200 रुपये देकर एक -दो दिन साफ-सफाई कराता है। करचलपुर के चंद्रपाल तो सफाई कर्मी मनोज गुप्ता का नाम तक नहीं जानते। बसावनपुर के राजू कहते हैं कि वह ही नहीं गांव के ज्यादातर लोग, सफाई कर्मी राम नारायण कुशवाहा को नहीं पहचानते हैं।
क्या कहते हैं जवाबदेह
शासन की पालिसी के तहत आरक्षण के आधार पर सफाई कर्मियों की नियुक्ति हुई है। अभी चुनाव के चलते 16 मई तक इस तरफ गौर करना मुमकिन नहीं। मतगणना के बाद इस दिशा में कड़े कदम उठाए जाएंगे।
नंदिनी जैन, डीपीआरओ, फतेहपुर
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