मुहर्रम के ताजियों पर छाई महंगाई

Fatehpur Updated Sun, 27 Oct 2013 05:40 AM IST
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फतेहपुर। आटा, दाल, चावल, प्याज, किराया, पेट्रोल, डीजल समेत सभी जरूरी चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं। शायद ही कोई ऐसी चीज हो, जिस पर महंगाई की मार न पड़ी हो। मुहर्रम में बनने वाले ताजियों पर भी महंगाई का असर छा गया है। पिछले साल की तुलना में इस बार मध्यम आकार का ताजिया 500 रुपये ज्यादा महंगा बिकेगा।
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ताजिया बनाने वाले कारीगर इस समस्या से परेशान है। उनका कहना है कि पिछले साल की तुलना में बढ़ी महंगाई का असर है कि ताजिया बनाने के लिए लगने वाला सामान महंगा हो गया है। छोटी बाजार के चूड़ी गली के पास हाफिज मकसूद ताजिया के पुराने कारीगर हैं। उनका कहना है कि मध्यम आकार का ताजिया इस बार 2000 के बजाय 2500 रुपये का बिकेगा। कारीगर परवेज और फैजी ने बताया कि मुहर्रम के अब कुछ दिन ही बाकी हैं लेकिन महंगाई का असर है कि अभी तक उम्मीद के मुताबिक ऑर्डर नहीं मिले हैं।
इनसेट
ईद-बकरीद जैसा है मुहर्रम का महत्व
- बाहर रह रहे बाशिंदे मुहर्रम पर जरूर आते हैं शहर
फतेहपुर। हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की कर्बला में हुई शहादत की याद में मनाए जाने वाले मुहर्रम का खासा महत्व है। यहां निकलने वाले जुलूस और नौ दिनों तक निकलने वाले ताजिये देश-प्रदेश के लोगों का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित करते हैं। शहर के बाशिंदे जो नौकरी और व्यापार की वजह से शहर के बाहर रहते हैं, वह मुहर्रम के मौके पर शहर जरूर आते हैं। मुहर्रम का चांद दीवाली के दूसरे दिन दिखने की संभावना है। इसके मद्देनजर मुहर्रम के ताजियों और अलम बनाने की तैयारियां तेज हो गई हैं। मुहर्रम के महीने के पहले दस दिन तक शहर में ताजियों का जुलूस शान-ओ-शौकत के साथ निकलता है। लोग किसी वजह से ईद और बकरीद पर शहर न आ सके हों, लेकिन मुहर्रम में जरूर आते हैं। विदेशों में रह रहे शहरी भी मुहर्रम में घर आने को लेेकर छुट्टियों का हिसाब जोड़े रहते हैं। मुहर्रम की नौ तारीख को निकलने वाले जुलूस में तो लाखों की तादाद में अकीदतमंदों की भीड़ होती है। शिया हजरात ने इमामबाड़ों की रंगाई पुताई कर ली है और ताजिया रखने की भी तैयारियां हो गई हैं। मजलिसों को पढ़ने वाले उलमा और दानिश्वरों को दावतें दे दी गई हैं। साथ ही नोहाख्वानी करने वाली अंजुमनों के साथ साथ मेहमान मातमी अंजुमनें भी मुहर्रम के दौरान शहर में दस्तक देंगी।

‘शहर का मुहर्रम बड़े पैमाने पर मनाया जाता है। यहां पर मुहर्रम का खासा महत्व है। शहर के बाहर रहने वाले लोग मुहर्रम में छुट्टियां लेकर शहर आ जाते हैं। मुहर्रम के महीने के पहले दस दिनों तक यहां पर काफी तादाद में अकीदतमंद शामिल होते हैं।’ - कारी फरीदउद्दीन, काजी-ए-शहर

‘मुहर्रम को लेकर रूट चार्ट के मुताबिक यातायात व्यवस्था बनाई जाएगी। यातायात व्यवस्था बाधित न हो, इसके लिए रूट डायवर्जन किया जाएगा।’ - एके सिंह, यातायात पुलिस प्रभारी
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