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टीचरों की फौज फिर भी शैक्षिक माहौल ध्वस्त

Fatehpur Updated Sun, 10 Feb 2013 05:31 AM IST
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फतेहपुर। सरकारी स्कूलों की शिक्षा राम भरोसे है। शासन व प्रशासन स्तर पर लाख चेतावनियों के बाद भी स्कूलों को पढ़ाई-लिखाई चौपट है। नतीजतन भारी भरकम खर्चे के बावजूद बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए अभिभावक निजी स्कूलों की ओर रुख करते हैं। कुल मिलाकर प्राइवेट संस्थानों की जय-जय। बेसिक शिक्षा विभाग परिषदीय स्कूलों बदतर शैक्षिक गुणवत्ता के पूरी तरह से दोषियों को बचा रहा है, जबकि शिक्षकों के शिर पर दोषा रोपण मढ़कर अपना खामियों को छिपाने की कोशिश कर रहा है। इस कार्रवाई का खामियाजा अब तक 359 टीचर भुगत चुके हैं और सवा दो सौ शिक्षामित्र भी कार्रवाई की भेंट चढ़ चुके हैं। बेसिक शिक्षा विभाग ने जिलेभर के परिषदीय स्कूलों की शैक्षिक गुणवत्ता के सुधार के लिए जिलेभर में प्रत्येक न्याय पंचायत स्तर पर एक एनपीआरसी (न्याय पंचायत रिसोर्स समन्वयक) नियुक्ति कर रखा है। इस तरह से पूरे जिलें 108 शिक्षक एनपीआरसी की जिम्मेदारी संभाले हुए हैं। इनके अलावा पूरे जिले 65 एबीआरसी के पद सृजित हैं। इनमें वर्तमान समय में कुल 49 बेसिक शिक्षक एबीआरसी (सह ब्लाक रिसोर्स समन्वयक) के पदों पर बैठे मौजमस्ती काट रहे हैं। एक दशक से अधिक समय से डेढ़ सौ से अधिक शिक्षक एनपीआरसी और एबीआरसी के पदों पर बैठे हैं, लेकिन इन्होंने एक बार भी अपने-अपने क्षेत्र की बदहाल हो रही शैक्षिक गुणवत्ता की रिपोर्ट न तो डायट प्राचार्य और न तो बेसिक शिक्षा विभाग को सौंपी है, जबकि इसी जिम्मेदारी का निर्वाहन करने के लिए यह अधिकारी बनकर मौज मस्ती काट रहे हैं। इन पदों पर कार्यरत टीचर कभी भी अपनी नियुक्ति वाले स्कूल नहीं जाते हैं और कभी कभार स्कू ल पहुंचकर हाजिरी भरकर चलते बनते हैं। इन सभी घर बैठे वेतन लेने की पोल जिलाधिकारी कंचन वर्मा के परिषदीय स्कूलों की शैक्षिक गुणवत्ता के आंकलन के लिए चलाए गए अभियान से खुली। गुणवत्ता की हालत बद बदतर हालत वाले तीन सौ स्कूलों में कार्यरत 359 टीचरों को डीएम के आदेश पर प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई है और सवा दो सौ शिक्षामित्रों का अग्रिम आदेश तक के लिए वेतन भुगतान रोका गया है। खास बात तो यह है कि अगर-अगर समय पर एनपीआरसी और एबीआरसी बदहाल हो रही शैक्षिक गुणवत्ता की रिपोर्टिग करते होते तो वर्तमान में शैक्षिक गुणवत्ता की हालत इन हालातों पर नहीं पहुंचती। ऐसी हालत में साफ है कि शैक्षिक गुणवत्ता बदहाल होने के सबसे बड़े दोषी एनपीआरसी और एबीआरसी हैं।
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दायित्वों की होगी समीक्षा-बीएसए
फतेहपुर। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राजेंद्र प्रसाद यादव का कहना है कि एबीआरसी और एनपीआरसी का काम स्कूलों की शैक्षिक गुणवत्ता की निगरानी के साथ ही सुधार के लिए प्रयास करना भी है, लेकिन जिस तरह से परिषदीय स्कूलों की शैक्षिक गुणवत्ता ध्वस्त मिली है, उससे इन कर्मचारियों की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा दिया है। जल्द ही एबीआरसी और एनपीआरसी के दायित्वों की समीक्षा की जाएगी और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई भी की जाएगी।

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