108 एंबुलेंस सेवा के दावों की हवा निकली

Fatehpur Updated Thu, 20 Dec 2012 05:30 AM IST
फतेहपुर। फ्री 108 नंबर डॉयल करने पर मुहैया समाजवादी एंबुलेस सेवा पर सरकारी डाक्टरों की कार्यप्रणाली से शुरुआती दौर में ही हासिये पर आ गई है। गौर करने वाली बात यह कि कई पीएचसी में सुबह दस बजे से पहले और शाम चार बजे के बाद मरीज अथवा घायल को न लाने का दबाव बनाया जा रहा है। अगर भूलवश एंबुलेंस किसी मरीज अथवा घायल को लेकर इस दौरान आ गई तो जरूरतमंद को देखने को यहां पर डाक्टर मौजूद नहीें मिलने वाले। कहा तो यहां तक जा रहा है कि कुछ सरकारी डाक्टर न सिर्फ उक्त समय पर मरीज न लाने को जोर दे रहे हैं बल्कि अवकाश दिवस पर भी इससे बचने का जोर डालने लगें हैं। हाल में ही जिले को पंद्रह समाजवादी एंबुलेंस मिली हैं। जिनमें दो जिला मुख्यालय में है, शेष ब्लाक स्तर पर दी उपलब्ध कराई गई है। इन एंबुलेंस का काम 108 नंबर घुमाने पर लखनऊ कंट्रोल रूम से मिली सूचना के आधार पर बताए ठिकाने पर पहुंच कर मरीज अथवा घायल को नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचाना है। लेकिन इन एंबुलेंस को इस मामले में शुरुआत में ही सरकारी डाक्टरों का शायद सहयोग मिलता नहीं लगता। उदाहरण के तौर पर बुधवार को ही ले तो सुबह नौ बजकर चौवन मिनट पर समाजवादी एंबुलेंस सड़क हादसे का शिकार हुई प्रतिभा नाम की छात्रा को लेकर खजुहा पीएचसी पहुंची। लेकिन इस दौरान यहां पर छात्रा को देखने के लिए डाक्टर नहीं थे। ऐसे में एंबुलेंस को तड़पती छात्रा को लेकर सीएचसी बिंदकी की दूरी नापनी पड़ी। गौरतलब यह है कि पीएचसी खजुहा के डाक्टरों की इस प्रेजेंटेशन से न सिर्फ एंबुलेंस मेें डीजल का खर्च बढ़ा वरन पीएचसी से सीएचसी बिंदकी की दूरी नापने के दौरान छात्रा की जान सांसत में रही। एंबुलेंस के एक चालक की माने तो सुबह दस बजे से पहले और शाम चार बजे के बाद किसी भी शक्ल पर मरीज-घायल लाए जाने से बचने को कहा जा रहा है। डाक्टर कहते है यार नौकरी करने दो। इतना एक अन्य एंबुलेंस चालक तो यह तक बता जाता है कि उसे रविवार और अन्य अवकाश दिवस से भी बचने को कहा गया है। अगर वह डाक्टर की बात मानता है तो दूसरे अस्पताल जाने पर डीजल खर्च होता है। देखा जाए तो यह एक उदाहरण मात्र है वरना मामला चाहे देवमई का हो अथवा असोथर का। सरकारी डाक्टर किस तरह की नौकरी कर रहे हैं किसी से छिपा नहीं है। मसलन सीएचसी खखरेड़ू की बात करते तो वहां तैनात डाक्टरों ने दिन बंाट रखे हैं। देवमई के एमओआईसी तो कानपुर में रहने की वजह से कभी भी पूर्वांह से पहले अस्पताल नहीं आ पाते हैं। ऐसी दशा में मातहत तीन अन्य डाक्टरों से क्षेत्र की जनता कितनी उम्मीद रख सकती है समझा जा सकता है।
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इस तरफ चौकस होगी नजर
सीएमओ आरएम श्रीवास्तव कहते है 108 एंबुलेंस सेवा चौबीस घंटे की है। ऐसे में पीएचसी व सीएचसी में नियुक्त डाक्टर की मौजूदगी अनिवार्य है। मरीज अथवा घायल को अगर एबुंलेंस पीएचसी या फिर सीएचसी लेकर जाए तो उपचार करने वाले डाक्टर मौजूद हो। इसके लिए मानीटरिंग कराई जाएगी।

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