सरकारी आवासों में किराएदारों का बसेरा

Fatehpur Updated Wed, 12 Dec 2012 05:30 AM IST
फतेहपुर। नहर विभाग की कालोनी में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के लिए बने छह आवास किराएदारों से आबाद हैं, जबकि मूल आवंटियों के शहर में ही पक्के मकान हैं। दिलचस्प बात यह है आवंटी अपने आवास में चैन से रह रहे किराएदारों से बकायदा किराया भी वसूल रहे हैं। किराएदारों में किसी का नहर विभाग से दूर दूर तक संबंध नहीं है। हैरत की बात यह विभाग को इसकी जानकारी भी है। सरकारी आवासों को किराए पर उठाने के खिलाफ समय-समय पर आवाज भी उठती रही है, लेकिन प्रशासन इस पर रोक लगाने के बजाय इस संबंध में उदासीन बना हुआ है।
सरकारी आवास किराए पर उठाने का मामला कहीं और का नहीं वरन जिला मुख्यालय का है। नहर विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के लिए 22 आवास बने हुए हैं। इनमेें से आधा दर्जन आवास किराएदारों की गृहस्थी का सालों से सहारा बने हुए हैं। इन आवासों को किराए पर उठाने वाले सभी आवंटियों के शहर में ही खुद के आशियाने बने हैं। अमर उजाला टीम मंगलवार को नहर विभाग की आवासीय कालोनी की हकीकत से रुबरू हुई। पड़ताल में विभागीय लापरवाही बखूबी उजागर हुई। मसलन विभाग ने अपने मुलाजिम पर सरकारी आवास किराए पर उठाने को लेकर कार्रवाई नहीं की।
आवास संख्या-डी 7 निचली गंगा नहर के कनिष्ठ लिपिक नौशाद खां के नाम आवंटित है। इस आवास में कई साल से ट्यूबवेल आपरेटर जगदीश किराया पर रह रहा है। विभागीय लिपिक का मकान भी नहर विभाग की बाउंड्री के पास है। विभागीय कालोनी की बाउंड्री कई साल से ध्वस्त है। आवंटी ने नहर विभाग की दो से तीन फुट जमीन पर कब्जा कर लिया है। आवास संख्या डी 17 निचली गंगा नहर में तैनात राजकुमारी के नाम आवंटित है। जबकि राजकुमारी का नासिरपीर में पक्का मकान है। उसके सरकारी आवास में गंभरी में तैनात टिण्डैल शिवशंकर का परिवार रहता है। कर्मी को तैनाती स्थल पर आवास बनाना चाहिए। लेकिन विभागीय संगठनों के याद दिलाने के बावजूद इस तरफ विभाग का ध्यान नहीं गया। जबकि कई जरूरतमंद विभागीय चतुर्थ श्रेणी कर्मी शहर में किराए के मकानों में रह रहे हैं। आवास संख्या डी 18 सिंचाई खंड में तैनात विनायक के नाम आवंटित है। लेकिन आंवटी का आवास से दूर का भी नाता नहीं रहा है। विनायक के नाम आवंटित आवास में नलकूप विभाग के मेठ राजबहादुर किराएदार के रूप में सपरिवार रह रहे हैं। जबकि आवंटी विनायक गढ़ीवा में बने अपने मकान में बीवी बच्चों के साथ रहते हैं।
आवास संख्या डी- 22 में सिंचाई विभाग जोनिहा के चतुर्थ श्रेणी कर्मी रामभरोसे के परिवार को रहना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं है। राम भरोेसे भी शांतीनगर के बाशिंदे हैं। उनके नाम आवंटित आवास में कई साल से निचली गंगा नहर के ही प्रेम शंकर का परिवार रहता है। आवास संख्या डी -04 का आवंटन कनिष्क लिपिक सिंचाई खंड विनोद कुमार के नाम है। यह सरकारी मुलाजिम पहले से ही नहर विभाग से कुछ दूर बसी सिंधी भट्ठा की बस्ती में रहता है। इसके अलावा वह चतुर्थश्रेणी कर्मचारी भी नहीं है। उसके आवास में फिलहाल ताला लगा मिला। एक बच्चे ने बताया कई माह से आवास नहीं खुला। फिर बोला संभवत: अंकल दफ्तर चले गए, लेकिन आंटी को तो होना चाहिए।
आवास संख्या डी- 15 नहर विभाग के चतुर्थ श्रेणी कर्मी प्रेमनारायण के नाम आंवटित है। बावजूद इसमें बाहरी लोग रहते हैं। जिनके बारे में कालोनी के लोगों को कोई जानकारी नहीं है। जबावजूद वह उनके बीच किराएदार बनकर रह रहे हैं।

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