भुगतान के नाम पर कर रहे खानापूरी

Fatehpur Updated Fri, 07 Dec 2012 05:30 AM IST
फतेहपुर। जननी सुरक्षा योजना की लाभार्थी को चौदह सौ व एक हजार की चेक के लिए जाने कितने पापड़ बेलने पड़ते हैं। लाभार्थी को आर्थिक मदद को पाने के लिए नजराना की रश्म अदायगी के बाद जब चेक भुगतान के लिए बैंक में लाइन में खड़ा होता है तो चेक पर एक हस्ताक्षर न होने की बिना पर लौटा दिया जाता है। यह दस्तखत करने होते है- संबंधित प्रसव केंद्र से वास्ता रखने वाले सरकारी अस्पताल के प्रभारी से। जो अक्सर ड्यूटी से नदारद रहते हैं।
रास्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन की जननी सुरक्षा योजना की मिलने वाली चेक का भुगतान सरकारी अस्पताल के प्रभारी की मौजूदगी पर निर्भर करता है। क्योंकि जिले के ज्यादातर सरकारी अस्पतालों के प्रभारी का गैर जनपद में निवास है। जहां पर बाकायदा ये प्राईवेट प्रेक्टिस करते है। ऐसे में अड़तालिस घंटे में जननी सुरक्षा योजना की चेक हासिल करने के प्रयास हाशिए पर किस तरह से नजर आ रहे हैं। अमर उजाला ने योजना की हकीकत जानने को छानबीन की तो निम्न तथ्य सामने आए।
देवमई पीएचसी के प्रभारी डा. रघुराज का निवास बर्रा कानपुर में है। डाक्टर साहब कभी भी ड्यूटी पर समय से नहीं आए। खुद पीएचसी के ही कुछ मुलाजिम इसके पीछे के कारण कानपुर में ही सुबह घर से निकलने के बाद प्राईवेट प्रेक्टिस में समय देना मानते हैं। नतीजा देवमई पीएचसी के प्रभारी की मारुति साढ़े ग्यारह बजे से पहले कभी भी कैंपस में नहीं आ पाती है। खखरेड़ू सीएचसी के प्रभारी डा. शशिकांत वर्मा इलाहाबाद में रहते हैं। अस्पताल में एक अन्य डा. नफीस तैनात है। दोनों ने आपस में सेवाएं देने के लिए दिन बांट रखे हैं। प्रभारी सप्ताह में बुधवार व शुक्रवार को ही सेवाएं देने को आते हैं। ऐसे में अड़तालिस घंटे में जेएसवाई का लाभ कैसे पाया जा सकता है इसे भली भांति समझा जा सकता है। हंसवा पीएचसी के प्रभारी महेश यादव का परिवार इलाहाबाद मेें रहता है। वह सप्ताह में बृहस्पतिवार व सोमवार को ही पीएचसी आते हैं। ऐसी स्थिति में चेकें डंप होती रहती हैं। ऐसे में लाभार्थी महिला परिजनों के साथ बेवजह परेशानी उठाने को परेशान होती हैं। खास यह है कि जरूरी ही नहीं कि ऊपर लिखे दिनों मेें भी प्रभारी सेवाएं देने को उपलब्ध ही हो। अब इसके पीछे के कारण चाहे जो हो।
हथगाम सीएचसी के प्रभारी तरुण पाठक इलाहाबाद में रहते हैं। इन पर प्राईवेट प्रेक्टिस करने के साथ इलाहाबाद का सरकारी आवास न छोड़ने का भी आरोप है। उक्त प्रभारी के विरुद्ध सीएमओ ने कई बार लिखा और आज गुरुवार को उनके स्थान पर नए प्रभारी के रूप में डा. आसुतोष पांडेय की तैनाती कर दी। ऐसे में समझा जा सकता है इस अस्पताल की लाभार्थी महिला चेक के लिए किस तरह भटक रहीं होगी। खजुहा पीएचसी से वास्ता रखने वाले जेएसवाई के लाभार्थी तो सबसे ज्यादा प्रभावित हुए है। दो माह से यहां के प्रभारी डा. आरके सिंह बीमार होने की वजह से अवकाश पर है। अस्पताल ने लाभार्थियों को बिना प्रभारी के दस्तख्वत की जो चेक दे रहा है, उन्हें बैंक लौटा रहा हैै। हालांकि सीएमओ ने उक्त अस्पताल पर बिंदकी सीएचसी के प्रभारी को तीन दिन के लिए अटैच कर रखा है।

क्या कहते है जवाबदेह
जननी सुरक्षा योजना का लाभ निर्धारित समय मेें लाभार्थी महिला को मिले। इसके लिए वह खुद मानीटरिंग करते है। कुछ हेल्थ सेंटर के प्रभारी की शिकायत मिली हैं। उन पर नजर रखी जा रही है। काम का ही दाम मिलेगा। उदाहरण के तौर पर हथगाम सीएचसी में नए प्रभारी की नियुक्ति को रखते हुए कहा प्रभारी गायब होगा तो फिर काम कैसे चलेगा। बात केवल जेएसवाई की नहीं वरन सारा दारोमदार अस्पताल प्रभारी पर ही तो निर्भर है- डा. आरएम श्रीवास्तव सीएमओ

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