हजार रुपए में बन रहे फर्जी स्मार्ट कार्ड

Fatehpur Updated Fri, 30 Nov 2012 12:00 PM IST
फतेहपुर। राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत स्मार्ट कार्ड के जरिए गरीबों को सस्ता इलाज मुहैया कराने की योजना अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ गई है। बीमा कंपनी की मनमानी से गरीबों को इलाज मिलना तो दूर अलबत्ता अपात्रों से रुपए लेकर फर्जी कार्ड बनाने का खेल चल रहा है। सूत्रों की माने तो स्थिति यह है कि एक हजार रुपए में कोई भी व्यक्ति आसानी से स्मार्ट कार्ड ले सकता है। यहां तक की कंपनी के लोग अस्पताल में जा जाकर स्मार्ट कार्ड बांट रहे है। यह कह पाना मुश्किल है कि प्रशासनिक व विभागीय अधिकारियों को इस अव्यवस्था के बारे में जानकारी नहीं है। बावजूद इसके अभी तक तक स्वास्थ्य बीमा योजना को पटरी पर लाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। न तो इस दिशा में बीमा कंपनी पर अंकुश लगाने की पहल अभी तक हुई है और न ही पात्रों को योजना के तहत उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित कराने के लिए संबंधित अस्पतालों को हिदायत दी गई है। बतादें कि वर्ष 2008 में शासन द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना शुरू की गई। इसके तहत बीपीएल परिवारों का स्वास्थ्य बीमा कराया गया। स्मार्टकार्ड के माध्यम से परिवार के अधिकतम पांच सदस्यों को साल भर में तीस हजार रुपए तक के निशुल्क इलाज की सुविधा है। इसके लिए कार्ड धारक को तीस रुपए में कार्ड देने की व्यवस्था है।
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काम करने वाले पैनल से बाहर बीमा योजना के तहत उक्त सुविधा जिले के कुल अठारह चिकित्सा केंद्रों में है। इनमें बारह निजी अस्पताल तथा छह सरकारी स्वास्थ्य केंद्र शामिल है। जिनमें जिला अस्पताल पुरुष एवं महिला तथा सीएचसी है। जानकारी के मुताबिक निजी अस्पतालों के पैनल में जिन्हें शामिल किया गया है उनमें कई ऐसे हैं जिनकी साख बेहद ही खराब है। जहां न तो इलाज की पर्याप्त सुविधा है और न ही संसाधन। बावजूद इसके ऐसे अस्पतालों को पैनल में शामिल किया गया है।
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किसी में नाम गलत तो किसी की फोटो
फतेहपुर। स्मार्ट कार्ड जारी करने की जिम्मेदारी भारत यूनाइटेड इंश्योरेंश कंपनी के पास है। कार्ड बनाने में की जा रही लापरवाही से विभिन्न प्रकार की दिक्कतें आ रही है। स्थिति यह है कि कार्ड में किसी का नाम गलत छप रहा है तो किसी की फोटो गलत चस्पा हो रही है। आलम यह है कि अलग-अलग कार्ड में एक ही व्यक्ति की फोटो प्रिंट किए जाने के तमाम प्रकरण देखने को मिले हैं। जिले में बीपीएल परिवारों की संख्या एक लाख के आसपास है। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक इसके सापेक्ष करीब बावन हजार परिवारों के ही कार्ड बन पाए हैं।

- स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत पैनल में कुल अठारह अस्पताल हैं। इनमें छह सरकारी स्वास्थ्य केंद्र तथा नर्सिंगहोम है। जिनका समय-समय पर मूल्यांकन किया जाता है। रही बात स्मार्ट कार्ड बनाने में खामियों की तो उसके पीछे कई कारण है। स्मार्ट कार्ड सिर्फ 2002 की बीपीएल सूची के आधार पर बनाने के निर्देश है। ग्राम पंचायत स्तर पर इसका समुचित अनुपालन नहीं हो पा रहा है। जो खामियां हैं उन्हें दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। फर्जी कार्डों की जांच के लिए अतिरिक्त सीएमओ को लगाया है। साथ ही अपर निदेशक स्वास्थ्य को भी सूचित कर दिया गया है। मामला कमिश्नर के संज्ञान में भी है। जांच के दौरान कहीं भी फर्जी कार्ड मिले तो एफआईआर दर्ज होगी। - डाक्टर आरएम श्रीवास्तव, मुख्य चिकित्साधिकारी

-स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत चयनित गरीबों को स्मार्ट कार्ड बनाने का काम तेजी से पूरा किया जा रहा है। इस बीच जो भी शिकायतें मिल रही हैं या जो भी गड़बड़ियां सामने आ रही हैं उन्हें दूर किया जा रहा है। चयनित लाभार्थियों को अगले कुछ दिनों में शतप्रतिशत स्मार्ट कार्ड जारी कर दिए जाएंगे।
-आदित्य शुक्ल, मंडल प्रभारी इंश्योरेंश कंपनी।

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