स्कूल आधा घंटे पहले खुलने के दावे हवाई

Fatehpur Updated Wed, 28 Nov 2012 12:00 PM IST
क्रासरशिक्षा पर हो रहे अनाप शनाप खर्च के बावजूद नतीजा ढाक के तीन पात है। शिक्षा का माहौल लाख कोशिश करने के बावजूद नहीं बन सका है। अक्सर बेसमय विद्यालयों का ताला खुलना, खुलने के बाद मास्साब का गप्पे हांकने में समय जाया करना और फिर एमडीएम बनवाने में जुट जाना इसके जीवंत प्रमाण हैं। ये कुछ ऐसी नजीरें हैं जो परिषदीय शिक्षा की दुर्दशा करने पर तुली हैं। अमर उजाला टीम ने मंगलवार को ब्लाक क्षेत्र के ऐसे शिक्षा के अंागन खंगाले। इस दौरान शिक्षा की जमानी हकीकत चौंकाने वाली नजर आई। विद्यालयों का ताला आधा घंटा पहले खुल जाने का आदेश हवा हवाई नजर आया।
सीन एक- समय: साढ़े दस बजे। आलमपुर के पूर्व माध्यमिक विद्यालय का ताला बंद है। छात्रा सारिका ताला खुलने का इंतजार कर रही है। पूछने पर बताया, अक्सर इसी तरह विद्यालय का ताला बंद रहता है। हेडमास्टर पंकज मिश्र आएंगे तभी स्कूल खुलेगा। कुछ छात्रों के विद्यालय के बाहर बस्ता रखे थे और बच्चे खेलने में मशगूल थे। खेल रहे बच्चों में नसीम अभी खेल की एक पाली आराम से हो जाएगी, तब आएगे मास्साब, कहते सुना गया।
सीन दो- समय: सुबह पौने ग्यारह बजे। पूर्व माध्यमिक विद्यालय जिगनी का ताला बंद था। जबकि प्राथमिक विद्यालय में कक्षाओं से आवाजें आ रही थीं। कक्षा आठ का छात्र नजीमउल्ला साइकिल से आया और स्कूल में ताला बंद देख साइकिल से नीचे उतरने का इरादा बदल दिया। करीब दस मिनट तक वह बार बार घड़ी देखता रहा। फिर अचानक घर लौटने का मन बना लिया। रोकने पर छात्र ने कहा हेड मास्टर मईयादीन व मास्टर पढ़ाने में रुचि नहीं रखते हैं। मुश्किल से दो घंटे भी पढ़ाई नहीं होती है।
सीन तीन- समय: ग्यारह बजे। पूर्व माध्यमिक विद्यालय दलेलखेड़ा खुला था। यहां 15 विद्यार्थी पंजीकृत मिले। इनमें पांच छात्र ही मौजूद थे। हेडमास्टर जगतपाल ने बताया शादी के चलते बच्चे कम आ रहे हैं। सहायक सीता देवी छह महीने से चाइल्ड केयर अवकाश पर हैं। ऐसे में विभागीय काम पड़ने पर विद्यालय में ताला लगाना मजबूरी है। कक्षा में मौजूद छात्र राज किताब पढ़ने के नाम पर ठिठक गया। कुरेदने पर कहा उसे किताब पढना नहीं आता है।
सीन चार- समय: साढ़े ग्यारह बजे। प्राथमिक विद्यालय केवई में कक्षाएं चल रही थी। कुछ छात्र बार बार ब्लैक बोर्ड से ध्यान हटा कर परिसर ताक रहे थे। जबकि मास्टर साहब बीच बीच में गौर करें सुरेश, गौर करें महेश जैसे नाम लेकर बच्चों को ब्लैक बोर्ड की याद दिला रहे थे। अशोक अपने नाम की स्पेलिंग नहीं बता पाया। कहा अंग्रेजी पढ़ाई नहीं जाती है। हेड मास्टर बंसू सत्यवादी ने बताया बच्चों को बेहतर तालीम देने के लिए पूरा स्टाफ लगा है। एमडीएम में दो घंटा का समय जाया होता है।

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