जगदंबे भवानी मैया तेरा त्रिभुवन में छाया राज है

Fatehpur Updated Sat, 20 Oct 2012 12:00 PM IST
फतेहपुर। नवरात्र के चौथे दिन मां कुष्मांडा देवी की पूजा अर्चना की गई। सुबह और शाम की आरती में भक्तों की भीड़ का आलम देखते ही बना। शुक्रवार हवन पूजन का सिलसिला शुरू हो गया है। यज्ञशालाओं में बड़ी तादाद में भक्त पहुंचकर आहुतियां देने लगे हैं। उधर, पांचवें दिन मां भगवती के स्कंदमाता स्वरूप की पूजा अर्चना होगी।
दुर्गा पूजन समारोह के चौथे दिन शहर मां भगवती के भक्तिभाव में सराबोर हो गया है। शहर के हर गली कूचे में सजे देवी पंडालों में दिनभर देवी गीतों की धुन सुनकर लोगों में सहज ही भक्तिभाव हिलोरें लेने लगता है। देवी मंदिरों में घंटा घड़ियाल की आवाजें गूंज रही हैं। भोर पहर से देर शाम तक मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहता है। नवरात्र के चौथे दिन यज्ञों का सिलसिला भी शुरू हो गया है। रामौतार सिंह महाविद्यालय शेषपुर उनवा में यज्ञ का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी तादाद में श्रद्धालुओं ने आहुतियां दीं। यज्ञ का आयोजन महाविद्यालय के संस्थापक करण सिंह ने किया। इस दौरान प्रसाद भी परोसा गया।
उधर, नवरात्र के पांचवें दिन शनिवार को मां भगवती के स्कंदमाता स्वरूप की पूजा की जाएगी। कई देवी पंडालों में स्कंदमाता की पूजा अर्चना को लेकर रतजगा भी आयोजन किया गया है।

कार्तिकेय ने ताड़कासुर का वध किया
कहा जाता है कि एक बार ताड़कासुर ने तपस्या करके ब्रह्मा से अजेय जीवन का वचन ले लिया। ब्रह्मा ने कहा कि इस संसार में जो आया है, उसे एक न एक दिन जाना पड़ा है, तो ताड़कासुर ने कहा कि यदि उसकी मृत्यु हो, तो शिव पुत्र के हाथों हो। ब्रह्मा जी न कहा कि ऐसा ही होगा। ताड़कासुर ने सोचा न कभी शिव विवाह करेंगे और न उनके पुत्र होगा और न ही उसकी मौत होगी, लेकिन होनी को कौन टाल सकता है। ताड़कासुर ने खुद को अजेय मानकर संसार में हाहाकार मचाना शुरू कर दिया। तब सभी देवी-देवता भगवान शंकर के पास पहुंचे और हाल सुनाया। देवताओं के आग्रह पर शंकर जी ने साकार रूप धारण कर पार्वती से विवाह रचाया। शिव और पार्वती के पुत्र का जन्म हुआ, जिसका नाम कार्तिकेय पड़ा। इन्हीं का दूसरा नाम स्कंदकुमार भी पड़ा। स्कंदकुमार ने ताड़कासुर का वध करके संसार को अत्याचार से मुक्ति दिलाई। स्कंदकुमार की माता होने के कारण मां पार्वती का नाम स्कंदमाता भी पड़ा। माना जाता है कि देवी स्कंदमाता के कारण मां-बेटे के संबंधों की शुरुआत हुई।

कैसे लगाएं भोग?
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माता के इस रूप की आराधना करने से भक्त को स्वत: ही सभी सिद्धियां प्राप्त होती हैं। पूरे दिन उपवास करने के बाद माता को केले का भोग लगाया जाता है। माता को केले का भोग लगाने से शरीर स्वस्थ रहता है।

इंसेट
रत्रि जागरण आज
फतेहपुर। श्री शंकर जी दुर्गा कमेटी आवास विकास कालोनी द्वारा सजाए गए मां भगवती पांडाल में शनिवार को रात्रि जागरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। यह जानकारी देते हुए कमेटी अध्यक्ष अरविंद नरायण मिश्रा ने बताया कि जागरण में प्रसिद्ध कीर्तनकार रिंकी तिवारी कानपुर और कौशलेंद्र द्विवेदी लखनऊ के बीच मुकाबला होगा।

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