जिला ‘सिलेंडर बम’ के मुहाने पर

Fatehpur Updated Wed, 17 Oct 2012 12:00 PM IST
फतेहपुर। जिला ‘सिलेंडर बम’ के मुहाने पर है जो कभी भी फटकर न जाने कितनों को काल के गाल में भेज सकते हैं। यह खतरा मियाद पूरी कर चुके रसोई गैस सिलेंडरों के कारण पैदा हुआ है। इससे रसोई गैस से खाना पकाने वाली पंद्रह फीसदी चौखटें खतरे में हैं। अधिकारी तो बेफिक्र हैं ही, उपभोक्ता भी इस ओर से बेखबर हैं जबकि सिलेंडर पर उसकी मियाद साफ लिखी होती है।
जिले में एलपीजी से खाना पकाने वाले परिवारों की संख्या अस्सी हजार के आसपास है। अकेले शहर में ही यह संख्या चालीस हजार का आंकड़ा छू रही है। इनमें बहुत कम संख्या ऐसी है, जिनकी रसोई में नए सिलेंडर पहुंच रहे हों। एक अनुमान के मुताबिक पंद्रह फीसदी परिवारों की रसोई में पुराने के साथ ही खतरे की घंटी बजाने वाले सिलेंडर दिए जा रहे हैं। एक सिलेंडर की लाइफ दस साल रखी गई है। ओआईसी सिलेंडर की लाइफ चेक कर उसे कुछ साल के लिए फिर एजेंसी में उतार सकती है लेकिन वर्तमान समय में जो रसोई गैस के सिलेंडर ओआईसी से आ रहे हैं उनमें ज्यादातर की मियाद बहुत पहले खत्म हो चुकी है। ऐसे में इनसे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
जागरूकता के अभाव में उपभोक्ता भी यह खतरा मोल ले रहे हैं जबकि हर सिलेंडर के ऊपर लगी तीन पत्तियों में एक में एक्सपायरी का वर्ष और महीना अंकित होता है, जिसे उपभोक्ता समझ ही नहीं पा रहा है।
अमर उजाला ने मंगलवार को एजेंसी के लिए आई डिलीवरी चेक की जिसमें खतरे की घंटी बजाने वाले कई सिलेंडर आईओसी की गाड़ी से उतरे मिले। दो सिलेंडर तो ऐसे थे जिनकी सात से दस साल मियाद पूरी हो चुकी है। इसके बावजूद उन्हें रिफिल कर लोगों की रसोई घर तक भेज दिया गया। कमोबेश ऐसा ही खतरा इंडेन गैस एजेंसी की डिलीवरी में भी देखने का मिला।

क्या कहती हैं एजेंसी
ललिता गैस एजेंसी- प्रबंधक ब्रजेंद्र प्रताप सिंह कहते हैं कि सिलेंडर में मैन्यूफैक्चर व एक्सपायरी डेट होती है। एजेंसी के लिए जो लोड आता है वह कन्ज्यूमर के बीच वितरित कर दिया जाता है।
इंडेन गैस एजेंसी- मैनेजर बाबू लाल का कहना है पुराने सिलेंडर पंद्रह से बीस फीसदी आ रहे हैं। उनकी मजबूरी है। इस पर कुछ कर नहीं सकते। यकीनन ये सिलेंडर घातक साबित हो सकते हैं।

आवाम की बात
एमजी कालेज के प्रिंसिपल डा.एके सिंह का कहना है हर वस्तु की मियाद होती है। इसमें गैस सिलेंडर भी शामिल है लेकिन शायद ओआईसी इस मामले में खरी नहीं उतर रही है और न ही कंज्यूमर। कंज्यूमर भी सिलेंडर मिल जाए, केवल इसी तक सीमित रहता है।
जिला उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष किशन मेहरोत्रा कहते हैं कि ओआईसी अपने नियम कायदे पर खुद नहीं चल रही है। नए सिलेंडर साल भर में एक दो बार ही घर की रसोई का हिस्सा बन पाता है। साफ है कि उम्रदराज सिलेंडर रिफिल कर कंज्यूमर और उसकी फैमिली को खतरे में डाला जा रहा है।

क्या कहते हैं अधिकारी
कंपनी के रीजन हेड मिस्टर भटनागर कहते है गैस सिलेंडर की कोई मियाद नहीं होती क्योंकि वह लोहे का बना होता है। तर्क रखा कि जिस प्रकार से वाहन की ओवर हालिंग होती है उसी प्रकार से ओआईसी पुराने सिलेंडरों की ओवरहालिंग करती है।

क्या कहता है सप्लाई डिवीजन
डीएसओ सुनील कुमार कहते हैं कि उनका काम केवल वितरण पर निगाह रखना होता है जिस पर पूरा प्रयास किया जाता है। रहा सवाल सिलेंडर की लाइफ का तो यह ओआईसी ही बता सकती है।

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