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चाय-पान की दुकान पर फिर पहुंचे दो हजार बच्चे

Fatehpur Updated Sun, 14 Oct 2012 12:00 PM IST
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फतेहपुर। श्रम विभाग द्वारा चलाई जा रही बालश्रमिक हितों की योजना ठप हो गई है। जिले में संचालित बाल श्रमिकों के विद्यालयों में तीन महीने से ताले झूल रहे हैं। ऐसी हालत में बाल श्रमिक एक बार फिर र्से इंट- भट्ठा और होटल, चाय की दुकानों पर पहुंच गए हैं। इसके बावजूद श्रम विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा है। उधर, अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही जिले में बालश्रम विद्यालय संचालित होंगे। प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक शहर के गढ़ीवा, खलीलनगर, राधानगर समेत पांच मोहल्लों में बालश्रमिक विद्यालय चल रहे थे जबकि बिंदकी में दो, बहुआ ब्लाक अयाह, शाह, असोथर, जहानाबाद कस्बे में चल रहे बाल श्रम विद्यालय बंद हो चुके हैं।
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श्रमविभाग ने पांच साल पहले जिले में बाल श्रमिकों का सर्वे कराया था। उस दौरान 1950 बाल श्रमिक चिह्नित किए गए थे। इसके बाद जिन बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए श्रमविभाग ने शहर समेत पूरे जिले में 39 बाल श्रमिक विद्यालय खोले गए थे। प्रति स्कूल में 50 बच्चों का पंजीकरण कराकर उन्हें पढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। स्वयं सेवी संस्थाओं द्वारा संचालित इन स्कूलों में दोपहर के समय बच्चों को भोजन देने का भी प्रावधान था। इसके अलावा गरीब परिवारों के बच्चों को मुफ्त में कापी-किताबें, खड़िया, स्याही, पेंसिल सहित अन्य पठन-पाठन सामग्री तथा साल में दो ड्रेस देने की व्यवस्था थी। हर माह इन बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कराकर शासन को रिपोर्ट भेजी जाती थी। प्रत्येक विद्यालय में दो शिक्षकों की नियुक्ति थी। श्रम विभाग ने एक झटके में 78 महिला शिक्षकों को तो बेरोजगार कर ही दिया है। साथ ही यहां पढ़ने वाले 1950 बच्चों को एक बार फिर से ईंट-भट्ठे व चाय-नास्ते की दुकान में काम करने के लिए छोड़ दिया है। यह स्कूल मई महीने तक संचालित रहे, लेकिन पहली जून से ताले बंद कर दिए गए। विद्यालय संचालक नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं कि श्रम विभाग के निर्देश पर स्कूल बंद कर दिए गए हैं। स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे कहां गए, इसका उनके पास कोई जवाब नहीं है। सहायक श्रमायुक्त राजेश कुमार का कहना है कि बाल श्रमिकों को पांच साल तक शिक्षित करके समाज की मुख्यधारा में जोड़ने का काम श्रम विभाग है, जो पूरा होने के बाद स्कूल बंद कर दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिए बच्चों के परिजनों से बच्चों के दाखिले के लिए कह दिया गया है। अब नए सिरे से बाल श्रमिकों का सर्वे कराकर स्कूल संचालित किए जाएंगे।
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