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हत्याकांड में इंजीनियर के गांव के चालक की भी तलाश

Kanpur	 Bureauकानपुर ब्यूरो Updated Tue, 21 May 2019 12:43 AM IST
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हसवा। इंजीनियर अजय हत्याकांड में सोमवार को पुलिस ने जीएमआर कंपनी के दो कर्मचारी को भी उठाया है। पुलिस ठेकेदार के साथ उसके चालक की तलाश भी कर रही है। चालक के भी हत्याकांड में शामिल होने के क्लू मिले हैं। चालक इंजीनियर के गांव का रहने वाला है। ठेकेदार और चालक दोनों के मोबाइल घटना के बाद से बंद हैं।
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इंजीनियर हत्याकांड के सात दिन बाद पुलिस अभी भी घटना का पर्दाफाश नहीं कर पाई है। हत्या में पुलिस फिरोजाबाद के ठेकेदार की भूमिका संदिग्ध मान कर तफ्तीश आगे बढ़ा रही है। इंजीनियर अजय की हत्या के पीछे पैसों का लेनदेन सामने आया है। पुलिस को इस कड़ी में एक और क्लू हाथ लगा है। एकारी में जीएमआर प्लांट में

ठेकेदार के चालक की भी भूमिका उजागर हुई है। सूत्रों की मानें तो ठेकेदार का चालक, इंजीनियर अजय के गांव रामनगर का ही रहने वाला है। पुलिस की पूछताछ में चालक का नाम सामने आने से नया मोड़ आ गया है। पुलिस टीमेें फिरोजाबाद में डटी हुई हैं। चालक के हाथ आते ही पुलिस मास्टरमाइंड तक पहुंचकर घटना का खुलासा करने की योजना बना रही है। थानाध्यक्ष संतोष कुमार शर्मा ने बताया कि पुलिस घटना के खुलासे के एकदम करीब पहुंच

चुकी है। दो दिन में आरोपियों के साथ घटना का पर्दाफास कर सकती है। पुलिस को घटना के पुख्ता सबूत हाथ लग चुके हैं। इसी लिए पुलिस की दो और टीमे आरोपियों की तलाश में जुट चुकी हैं।


ठेकेदार व चालक से अजय के मधुर संबंध थे। कर्मचारियों की मानें तो ठेकेदार का चालक कभी-कभी प्लांट आता था। एक ही गांव के होने की वजह से पहले दोनों के बीच लंबी बातें भी होती थीं। अचानक दो माह से ठेकेदार, उसके चालक और इंजीनियर से तल्खी देखने को मिलती थी।
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मजदूरी का भुगतान न होने से ब्रिज निर्माण पर लगा ब्रेक
- कंपनी का काम हो रहा प्रभावित
हसवा। इंजीनियर अजय की हत्या के बाद से पुलों के निर्माण में ब्रेक लग गया है। ठेकेदार के गायब होने से मजदूरी का भुगतान न होने के कारण मजदूरों ने काम करना बंद कर दिया है। काम बंद होने से तय समय में काम पूरा करने में विलंब हो सकता है।
हत्या के बाद पुलों का निर्माण रुक गया है। इसकी मुख्य वजह मजदूरों का भुगतान न होना है। इंजीनियर की हत्या के बाद उनके पुल निर्माण की जिम्मेदारी किसी दूसरे इंजीनियर को अभी तक नहीं सौंपी गई है। निर्माण तकरीबन 70 फीसदी पूरा हो चुका है। निर्माण पूरा करने के लिए शिस्ट्रा के इंजीनियर नहीं आ रहे हैं। ठेकेदार के गायब होने के कारण मजदूरों का पिछला भुगतान भी नहीं हुआ है। तय समय सीमा में पुलों का निर्माण पूरा होने में संशय पैदा हो गया है। कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर श्रीकांत ने बताया कि जबतक ठेकेदार वापस नहीं आ जाते तब तक कार्य बाधित रहेगा। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद ही पुलों का निर्माण शुरू हो पाएगा।
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